रायगढ़ - - विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर स्पंदन एवं काव्य वाटिका पटल के संयुक्त तत्वावधान में एक ऑनलाइन काव्य-गोष्ठी एवं विचार-विमर्श कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन तथा वर्तमान समय में बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के प्रति जन-जागरूकता उत्पन्न करना था। गोष्ठी में रायगढ़ सहित विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकारों, पर्यावरण प्रेमियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता करते हुए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का नैतिक एवं सामाजिक दायित्व है। उन्होंने वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष बल दिया। वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन, वनों की अंधाधुंध कटाई, बढ़ते प्रदूषण और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए इनके समाधान हेतु सामूहिक एवं सतत प्रयासों की आवश्यकता बताई। साथ ही सभी प्रतिभागियों ने अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण-अनुकूल व्यवहार अपनाने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण काव्य-पाठ रहा, जिसमें रचनाकारों ने अपनी प्रभावशाली कविताओं के माध्यम से प्रकृति, पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से अभिव्यक्त किया। कविताओं ने उपस्थित श्रोताओं को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराने के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित भी किया।वहीं इस अवसर पर डॉ. आशा मेहर 'किरण', मनोज श्रीवास्तव, साधना मिश्रा, दिव्या पाण्डेय, रश्मि वर्मा, कृष्णा पटेल, डॉ. अजय पटनायक 'मयंक', सुखदेव राठिया 'बनगइहां', स्वाति पड्या, प्रकाश चंद्रा, डॉ. मनीषा अवस्थी सहित अनेक साहित्यकारों एवं रचनाकारों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में डॉ. अजय पटनायक 'मयंक' ने सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण हेतु निरंतर जन-जागरण अभियान चलाने तथा समाज में पर्यावरणीय चेतना के प्रसार के लिए सतत प्रयासरत रहने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।











