रायगढ़ - - 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर “भारती भाषा संवर्द्धन संस्थान “(UAE)द्वारा“गणतंत्र को समर्पित एक शाम -देश की मिट्टी के नाम -काव्य संध्या “के गौरवशाली ऑनलाइन अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन में छत्तीसगढ़ भारत से मीनकेतन प्रधान का काव्य पाठ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष भूपेन्द्र कुमार ने की तथा आकर्षक मंच संचालन शालिनी वर्मा ( प्रवासी साहित्यकार-दोहा,कतर ) ने किया।आरंभ में उपाध्यक्ष अचला भूपेन्द्र और सचिव समीक्षा तेलंग द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुति सहित आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर मीनकेतन प्रधान ने अपने काव्य संग्रह “ दुनिया ऐसी “ कृति से समसामयिक कविता ‘ फक्र है उन पर ‘ का पाठ कर सरहदों पर देश की हिफ़ाज़त करने वाले वीर जवानों की शहादत को स्मरण करते हुए श्रद्धांजलि स्वरूप इन पंक्तियों को प्रस्तुत किया— बहुत है 'एक' शब्द /इनकी श्रद्धांजलि में /बलिदानी की कथा ऐसी /नहीं समाती 'कविता' में/ नया सोचते। उनकी अन्य कविता “प्रवास “ प्रवासी साहित्यकारों और विदेश में रहने वाले भारतीयों के जीवन संघर्ष तथा अपने देश के लिए अपार समर्पणशीलता की भावना से संबंधित है-प्रवास में /लोग हमारे /अलग-अलग देश होते, अकेले में /उनकी आत्मा बोलती /दुकेले में मन /और आँखों में पलते / सपने दूर के।” इस ऑनलाइन आयोजन में देश -विदेश के कवियों की भागीदारी रही ।

प्रतिष्ठित साहित्यकार सुषमा रजनीश (भारत) ,कौसर भुट्टो (दुबई),अवधेश राणा (अबू धाबी),सारा अली खान (कतर ),एमडीएस राम लक्ष्मी (दोहा कतर ),समीक्षा तैलंग (दुबई) , अचला भूपेन्द्र (यू ए.ई.) तथा शालिनी वर्मा ने समसामयिक रूप से राष्ट्रीय-सांस्कृतिक चेतना तथा मानवीय संवेदनाओं से ओतप्रोत कविताओं का पाठ किया । समाहार रूप में अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भूपेन्द्र कुमार ने कहा कि संस्थान द्वारा विगत वर्षों से निरंतर हिन्दी सहित भारतीय समस्त भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के उत्थान के लिए वैश्विक स्तर पर अनेक आयोजन किये जाते रहे हैं।उन्होंने हिन्दी भाषा-साहित्य के अन्तर्राष्ट्रीय प्रसार के लिए किये जा रहे उद्यमों पर विस्तार से जानकारी दी तथा भारतीय राष्ट्रीय एकात्मकता को सशक्त करने का पुरज़ोर आह्वान किया। इसके लिए डॉ.बेठियार सिंह साहू, चिरंजीव राव, डॉ.ज्ञानेश्वरी ,अमित , रेनू, मनहरण सिंह ठाकुर,सोनल ,अंजनी तिवारी सुधाकर,शत्रुघ्न,रमेश चंन्द्र श्रीवास्तव , शीतल पाटनवार पंकज, हरिशंकर गौरहा ,लोचन गुप्ता ,प्रो.आर.के. पटेल,डॉ.एस.पी.गुप्ता एवं अन्य साहित्यकारों-बुद्धिजीवियों ने बधाई दी है ।










