हे नाम रे, सबसे बड़ा तेरा नाम शेरोवाली……

उमंग, ताल संग मस्त गरबा की थिरकन

शहर की फिजा में मधुर भक्ति गीतों की सुंगध

रायगढ़ - - शारदेय क्वांर नवरात्रि महापर्व को शहर में अत्यंत ही श्रद्धा व उत्साह के साथ माता जगतजननी के भक्तगण पहले दिन से मना रहे हैं। वहीं मंदिरों के अतिरिक्त शहर के अनेक स्थानों में बनाए गए खूबसूरत पंडाल में गरबा डांडिया का भव्य आयोजन किया जा रहा है। जहाँ माता भवानी की प्रतिमा के समक्ष श्रद्धालु गण गरबा के पारंपरिक वेशभूषा में सज - धजकर जगतजननी के भक्ति गीतों संग खूबसूरत गरबा नृत्य की लयकारी के साथ माता भवानी की आराधना में पवित्र मन से तल्लीन है ।

गरबा का मूल आशय - - गरबा - -दरअसल  “गरबा” शब्द संस्कृत के गर्भ से बना है, जिसका आशय गर्भ या जीवन है। और इसी से “गरबो” शब्द बना, जिसका मतलब है मिट्टी का घड़ा जिसमें अंदर दीया जलाया जाता है। नवरात्रि के दौरान यह दीया ईश्वर की अनंत शक्ति और देवी के प्रकाश का प्रतीक होता है। जब लोग इस घड़े या दीपक के चारों ओर गोल घेरा बनाकर नृत्य करते हैं तो उसका अर्थ केवल नाचना-गाना नहीं होता। इस गोल घेरे का मतलब है जीवन का चक्र, जन्म, मृत्यु और पुनर्जन्म। यानी सब कुछ बदलता रहता है, लेकिन बीच में रखा दीपक या देवी शक्ति हमेशा स्थायी रहती है। इसीलिए गरबा केवल मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह नृत्य एक आध्यात्मिक पूजा है, जिसमें ताली, कदम और ताल के माध्यम से देवी को समर्पित करते हुए पवित्र मन से माता जगतजननी की आराधना पूजा की जाती है।

डांडिया एक खूबसूरत नृत्य - - गरबा जहां गर्भ जीवन का प्रतीक है। वहीं डांडिया नृत्य का प्रतीक है। साथ ही इसे डांडिया रास भी कहा जाता है। इसमें लकड़ी की डंडियों का उपयोग होता है जो देवी दुर्गा की तलवार का प्रतीक माना जाता है। जब लोग डंडियों को आपस में टकराते हैं तो यह मां दुर्गा और राक्षस महिषासुर के बीच हुए युद्ध की याद दिलाता है। यह केवल खेल नहीं, बल्कि अच्छाई और बुराई की लड़ाई का भी प्रतीक है। परंपरा के अनुसार, गरबा आमतौर पर आरती से पहले खेला जाता है, जबकि डांडिया आरती के बाद। इसका मतलब है पहले शांति और भक्ति का माहौल, फिर जोश और उत्सव का आनंद। आकर्षण का केंद्र गुजराती पारा का गरबा - - शहर के गुजराती पारा गरबा उत्सव का अपना गरिमामयी इतिहास है। यहाँ अनेक वर्षों से गुजराती समाज के श्रद्धालुओं द्वारा गरबा बनाकर पूरे नौ दिनों तक माता भवानी की पूजा - अर्चना की जाती है। वहीं इस बार भी शारदेय क्वांर नवरात्रि महापर्व की खुशी में श्रद्धालुओं द्वारा गरबा बनाया गया है। जहाँ प्रतिदिन विधि विधान से पूजा अर्चना की जा रही है और भक्तगण गरबा के पारंपरिक वेशभूषा व मधुर भक्ति गीतों संग देर रात तक डांडिया नृत्य करते हुए अपने परिजन के साथ थिरक रहे हैं।

सुभाष चौक हनुमान मंदिर में गरबा उत्सव - - शहर के सुभाष चौक में भी गुजराती समाज व अन्य समाज के श्रद्धालुओं की पहल से विगत कई वर्षों से हर शारदेय क्वांर नवरात्रि महापर्व में गरबा उत्सव का आयोजन किया जाता है। जिसको देखने के लिए शहरवासियों की भीड़ भी उमड़ती है।वहीं इस बार भी हनुमान मंदिर के परिसर में गरबा डांडिया नृत्य उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।जहाँ भक्तगण गरबा के मधुर तराने व ताल संग निहाल होकर थिरक रहे हैं।जिसे देखकर हर किसी का मन भी पुलकित होकर अनायास ही झूम रहा है।

विभिन्न स्थानों में गरबा डांडिया की थिरकन - - शहर के अनेक स्थानों में तीन दिवसीय माता भवानी पूजा के लिए आकर्षक दिव्य पंडाल बनाए गए हैं। जिसके परिसर में शहर की युवतियाँ, महिलाएँ, बच्चे और युवा गुजराती वेशभूषा में सजकर हाथों में रंग - बिरंगे डंडा लेकर भक्ति गीतों के साथ थिरक रहे हैं।वहीं भक्ति के एक से बढ़कर एक हृदयस्पर्शी गीतों के संग गरबा नृत्य की मनभावन प्रस्तुति देते हुए माता भवानी के प्रति अपनी श्रद्धा को अभिव्यक्त कर रहे हैं। महिला समन्वय रायगढ़ द्वारा

खड्ग धारिणी गरबा का भव्य शुभारंभ - - 29 सितंबर सप्तमी तिथि के दिन नटवर स्कूल के मैदान में खड्ग धारिणी  गरबा का (सेवा भारती समिति के मार्गदर्शन में) महिला समन्वय रायगढ़ द्वारा भव्य शुभारंभ किया गया। प्रांगण में श्री राम जी की प्रतिमा एवं द्वादश ज्योतिर्लिंग की  स्थापना तीन दिवसीय महोत्सव के लिए की गयी। साथ ही आदिशक्ति मां जगदंबे का  दिव्य दरबार कला एवं संस्कार की नगरी रायगढ़ को और भी सुशोभित कर रहा है। नगर के गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में मां अंबे की भव्य आरती के साथ तीन दिवसीय  खड्ग धारिणी गरबा महोत्सव का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती आशा त्रिपाठी ( माता शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी ),श्रीमती सीमा विश्वास (लेक्चर गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज  एवं पत्नी सुजीत विश्वास आयकर अधिकारी रायगढ़)  एवं पूज्य श्री सत्यनारायण बाबा जी की माता जी उपस्थित रहीं। विगत एक माह से महिला समन्वय की मातृशक्तियां कार्यक्रम को भव्यता देने में जुटी हुई थीं। खड़्गधारिणी गरबा की विशेष बात यह है कि यह पूर्ण रूप से सनातनी बहनों के लिए आयोजित किया गया है । महिला समन्वय रायगढ़ द्वारा इस गरबा के माध्यम से  सर्व हिंदू समाज की बालिकाओं, युवतियों एवं माताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया है। सर्व हिंदू समाज की महिलाएं एक साथ माता रानी के दरबार में गरबा कर रही है जो की सामाजिक समरसता का प्रतीक है। महिला समन्वय रायगढ़ आगे भी ऐसे ही आयोजन करती रहेगी।वहीं आज 30 सितंबर महाष्टमी को खड़्गधारिणी गरबा के  प्रांगण में गंगा आरती के तर्ज पर माता की भव्य आरती की जाएगी ।रायगढ़ के सभी सनातनी बन्धु, भगिनी से आग्रह है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर मां अंबे का आशीर्वाद  प्राप्त करें।

गरबा डांडिया उत्सव देखने उमड़ रही भीड़ - - नवरात्रि पर्व की खुशी में शहर में इन दिनों गरबा उत्सव की भी विशेष धूम है। मंदिर हो या माता का पंडाल इन स्थानों में बड़ी भव्यता के साथ गरबा उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।वहीं रात आठ बजते ही शहरवासी निर्धारित गरबा उत्सव में अपने परिजन के साथ पहुँच रहे हैं और प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ भी उमड़ने लगी है व देर रात तक गरबा उत्सव का आनंद भी ले रहे हैं। यह भव्य उत्सव की धूम पूरे नवरात्रि तक रहेगी।

SK
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