ताड़ पत्रों में संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों में उकेरी गई है आयुर्वेद से संबंधित नाडी विज्ञान

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में चल रहा सर्वेक्षण कार्य

रायगढ़ - - ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्य के अंतर्गत भारत के प्राचीन ज्ञान परंपरा को सूचीबद्ध और संरक्षित करने का अभियान पूरे भारत में चलाया जा रहा है। इस कड़ी में रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के दिशा निर्देशन में संयुक्त कलेक्टर पूजा बंसल के मार्गदर्शन में चल रहा है। प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति से जुड़ी  महत्व पूर्ण खोज ताड़पत्र पर लिखे सदियों पुराने लगभग 200 वर्ष पूर्व में लिखा गया  आयुर्वेद से जुड़ी नाडी विज्ञान से संबंधित विवरण का पता चला है। रायगढ़ के कोतरा रोड हनुमान मंदिर के पास सत्येंद्र मिश्रा और राजेंद्र मिश्रा ने अपने पड़ दादा जी के आयुर्वेद ,नाड़ी विज्ञान संबंधित 5  पांडुलिपियों को बहुत ही जतन करके रखे हैं।  यह पांडु लिपि  आयुर्वेद की उस प्राचीन परंपरा  को उजागर करती है  जिससे नाड़ी स्पर्श के माध्यम से शरीर में स्थित  रोग प्रवृत्ति ,मानसिक संतुलन , कफ, वात,पित्त का आकलन किया जाता था।

चिकित्सा पद्धति की बेहद खास बातें इन ताड़ पत्रों में सुरक्षित हैं। सत्येंद्र मिश्रा  ने कहा कि उनके दादाजी स्वर्गीय विश्वनाथ मिश्रा आयुर्वेद के साथ साथ नाड़ी विज्ञान में भी सिद्धस्थ रहे। वे रायगढ़ के प्रसिद्ध राजा चक्रधर सिंग के नौ रत्नों में से एक थे।तत्कालीन समय के बेहद लोकप्रिय,ख्याति लब्ध वैध थे उनके विद्वता के प्रभाव के कारण स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधान मंत्री स्व पंडित जवाहर लाल नेहरू के नाड़ी देखने आनंद भवन भी गए थे। वहां नेहरू जी के नब्ज स्पर्श कर उन्हें आधी व्याधि के बारे में बताया था। 

इस तरह बहुत ही ज्ञान वर्धक रोचक जानकारी मिश्रा बंधुओं से प्राप्त हुई। लाल कपड़ों में लिपटी पांडुलिपियों में अनमोल ज्ञान,विज्ञान के खजाने ओड़िया और संस्कृत मिश्रित भाषा में कई प्राचीन सूत्र आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान के अनछुए पहलू ओ पर नई जानकारियां प्राप्त हो सकती है। श्रीमती विनीता पाणी के सहयोग से विकास रंजन सिन्हा और राष्ट्रीय सेवा योजना शास उच्च मा  वि बड़े भंडार की कार्यक्रम अधिकारी पुष्पांजलि दासे  की सर्वे कार्य में अहम भूमिका रही।

SK
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