रायगढ़ जिले में पांडुलिपि सर्वेक्षण का कार्य प्रगति पर डिप्टी कलेक्टर पूजा बंसल ने मीनकेतन प्रधान के आवास में पांडुलिपि का अवलोकन किया
रायगढ़ - - भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा क्रियान्वित “ज्ञान भारतम् “ राष्ट्रीय मिशन के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ में रायगढ़ जिला प्रशासन , वांछित उद्देश्य पूर्णता की दिशा में तेज़ी से क्रियाशील है। जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में डिप्टी कलेक्टर श्रीमती पूजा बंसल द्वारा जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं उपस्थित रहकर साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों, ग्रंथालयों , संस्कृति कर्मियों, लोक कलाकारों , संगीत साधकों आदि प्रत्येक वर्ग के व्यक्तियों से मिल कर तथा अन्य माध्यमों से सम्पर्क कर पुरानी पांडुलिपियों का सर्वेक्षण - अवलोकन किया जा रहा है तथा आनलाइन पोर्टल में सूचीबद्ध किया जा रहा है। जिससे प्राचीन ताड़पत्र, भोजपत्र, कागज आदि पर हस्तलिखित पुरानी दुर्लभ सामग्रियाँ- साहित्य , संस्कृति, धार्मिक, ऐतिहासिक, भौगोलिक,पौराणिक, लोक कथा , लोक गीत , गणित, चिकित्सा , विज्ञान विषयक, कृषि विषयक पांडुलिपि आदि के सर्वेक्षण में व्यापक सफलता मिल रही है। आज मीनकेतन प्रधान , डॉ. श्रीमती विद्या प्रधान के हाउसिंग बोर्ड कालोनी रायगढ़ स्थित आवास में जाकर डिप्टी कलेक्टर श्रीमती पूजा बंसल , हरिकेश्वर लकड़ा राजस्व अधिकारी नगर निगम ,निरंजन गुप्ता सहायक राजस्व निरीक्षक नगर निगम, गुरुदेव दासे नगर निगम ,जोहेब कादरी डाटा एंट्री आपरेटर द्वारा ताड़पत्र में लिखित ओड़िया लिपि की भक्ति परक दुर्लभ साहित्यिक सामग्री का सर्वेक्षण किया गया ।जिसे उन्होंने निर्भय गुप्ता ग्राम लिंजिर से हस्तगत कर संयुक्त संरक्षण में रखा है।

इस अवसर पर मीनकेतन प्रधान ने कहा कि आज के वैज्ञानिक और तकनीकी युग में भारतीय ज्ञान और सृजनात्मक दुर्लभ सामग्रियों का संरक्षण, डिजिटलीकरण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। श्रीमती पूजा बंसल ने कहा कि इस अभियान में प्रत्येक स्तर पर समाज में जिनके पास भी पांडुलिपियाँ हैं उन्हें प्राप्त कर भारत सरकार के महनीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जिला प्रशासन सक्रिय है।मीनकेतन प्रधान ने अपने आवासीय विश्व हिन्दी अधिष्ठान कार्यालय में स्वयं की प्रकाशित पुस्तकें श्रीमती बंसल को भेंट की। “ ज्ञान भारतम “ राष्ट्रीय मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप साहित्यिक सामग्री प्रख्यात साहित्यकार पं. लोचन प्रसाद पांडेय की हस्तलिखित प्रतियों का सर्वेक्षण उनके प्रपौत्र मनीष पांडेय के रायगढ़ आवास में जा कर किया गया है। पंडित मुकुटधर पांडेय , बंशीधर पांडेय, शिवकुमार पांडेय , पं. किशोरी मोहन त्रिपाठी, पं. चिरंजीव दास आदि के परिजनों सहित रामभजन पटेल ,रवि मिश्रा ,प्रभात त्रिपाठी ,अंजनी तिवारी सुधाकर, प्रो. आर. के. पटेल, डॉ . रमेश कुमार टंडन( खरसिया)श्रीमती गीता ठाकुर ( संगीत विषयक पांडुलिपि),वसंत पंडा, डॉ. आशा मेहर ,हर किशोर दास , डॉ. प्रभात त्रिपाठी ,डॉ. मनीषा अवस्थी ,डॉ. हेमचंद्र पांडेय ,शिवशरण पांडेय, श्रीमती साधना मिश्रा,तृप्ति अग्रवाल,प्रो. अंबिका वर्मा , जागेश्वर प्रसाद गुप्ताडॉ. सौदागर प्रसाद गुप्ता,कमल बोहिदार,सुभाष त्रिपाठी , निर्भय राम गुप्ता आदि के माध्यम से पांडुलिपियाँ मिलना संभावित है। जिनसे सतत सम्पर्क किया जा रहा है।
जिला प्रशासन द्वारा जिले के सभी संबंधित लोगों से अपेक्षा की जा रही है कि वे अपने पास संरक्षित पुरातन पांडुलिपियों की जानकारी दें जिनको सूचीबद्ध कर ऑन लाइन प्रविष्टि की जायेगी । मूल पांडुलिपि संबंधित संरक्षक के पास ही रहेगी, उसे लिया नहीं जायेगा ।यह ध्यान देने योग्य है कि चाँदी, ताम्र पत्र सिक्का , मुद्रित सामग्रियां , पांडुलिपि अर्थात् हस्तलिखित श्रेणी में परिगणित नहीं हैं ।







