"माँ" तू जननी, तू आधार, तुम ही जीवन

मदर्स डे -

"माँ "शब्द अनंत है। जिसे परिभाषित कर पाना हर किसी के लिए मुश्किल है। माँ शब्द में संपूर्ण जीवन समाया है। उनका ममत्व घनी छाँव है। जिनके तले आते ही जहाँ से हम पूरी तरह से अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। "माँ "शब्द एक छोटा सा शब्द है। हर बच्चे चाहे वो किसी भी उम्र का हो उनकी ममता सदैव पाता है। उनकी कमी कोई भी पूरी नहीं कर सकता। माँ के द्वारा सिखाई गई शिक्षा सभी बच्चों के लिए किसी पूँजी इसे कम नहीं होती है जो जीवन के हर मोड़ पर एक ढाल की तरह काम आती है। मातृ दिवस "मदर्स डे" को यूँ तो सभी लोग अपने - अपने ढंग से मनाते हैं। परंतु जीवन का प्रतिपल माँ के लिए एक खास दिवस से भी ज्यादा मायने रखता है। जिसे अभिव्यक्त भी नहीं किया जा सकता। वैसे इस दिवस को मनाने का प्रमुख प्रयोजन अपनी जननी "माँ" के प्रति हृदय से अगाध स्नेह को सम्मान के साथ प्रकट करना है। जीवन का यह परम सत्य है कि "माँ" बच्चे की पहली शिक्षिका होती हैं और पहला मित्र भी। माँ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे जन्म देने के बाद सदैव उसका हृदय और आत्मा की गहराई से पालन – पोषण करती हैं साथ ही सदैव ख्याल रखती हैं। "माँ" हमेशा से अपने बच्चे के मन के हर हाव – भाव  को मन से समझती हैं। साथ ही वह बिना किसी लोभ - स्वार्थ के अपने बच्चे से खुद से ज़्यादा अगाध स्नेह करती हैं और स्वयं से पहले अपने बच्चे की हर ज़रुरत को पूरा करने के लिए कोई कमी नहीं करती हैं। हर व्यक्ति के लिए" माँ" पूरा संसार है। इसलिए हमारा भी कर्तव्य बनता है कि हम अपनी "माँ" का हृदय से सम्मान करें और उनका हमेशा ख्याल रखें ताकि उनको जीवन की हर खुशी मिले और उनके स्नेह, आशीर्वाद से हमारे जीवन का बगिया हमेशा महकता रहे।

श्रीमती दिशा थवाईत थवाईत महिला समिति अध्यक्ष

रायगढ़ छत्तीसगढ़

SK
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