छत्तीसगढ़ी फिल्म समीक्षक - डॉ दयानंद अवस्थी
रायगढ़ - - क्षेत्रीय भाषाओं की फ़िल्मों में माटी की महक, संस्कृति की झलक और मधुर संगीत की खनक—ये तीनों तत्व अनिवार्य होते हैं। आज का दर्शक जहाँ विविध मनोरंजन प्लेटफॉर्म्स का आदी हो चुका है, वहीं पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों पर आधारित कहानियाँ धीरे-धीरे पीछे छूटती जा रही हैं। ऐसे समय में इस तरह की फ़िल्में तीव्र गर्मी में शीतल बयार की तरह महसूस होती हैं-जो हँसाती हैं, गुदगुदाती हैं और पारिवारिक रिश्तों के ताने-बाने को सहज रूप से आत्मसात करने की प्रेरणा देती हैं।

इन्हीं चुनौतियों के बीच निर्देशक संजय जैन और क्रिएटिव डायरेक्टर क्रांति दीक्षित के निर्देशन में 1 मई को छत्तीसगढ़ के 43 सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई छत्तीसगढ़ी फ़िल्म *“प्रेम रोग”* एक साफ-सुथरी और भावनात्मक कहानी लेकर आती है। फ़िल्म में प्रेम के साथ-साथ पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को बेहद सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। कहानी मुख्य रूप से नायक प्रेम और नायिका पूजा के इर्द-गिर्द घूमती है। ग्रामीण परिवेश से शुरू होने वाली यह कहानी छत्तीसगढ़ की सादगी और संस्कृति का जीवंत चित्रण करती है। प्रेम के पिता एक आयुर्वेदिक वैद्य हैं, जो अपनी विरासत बेटे को सौंपना चाहते हैं, जबकि माँ उसकी शादी को लेकर चिंतित रहती है। इसी बीच प्रेम को शहर की एक कॉलेज छात्रा पूजा से प्रेम हो जाता है। कहानी में रोचक मोड़ तब आता है जब माता-पिता के कहने पर विवाह हेतु कन्या देखने जाते समय प्रेम को वही लड़की मिलती है जिससे वह प्रेम करता है। दोनों का विवाह हो जाता है, लेकिन इसके बाद परिवार में बहू के आगमन के साथ नई परिस्थितियाँ और चुनौतियाँ सामने आती हैं—यहीं से कहानी और दिलचस्प बनती है। कहानी में खलनायक का भी विशेष स्थान है, जो एक प्रतिस्पर्धी आयुर्वेदिक औषधि विक्रेता के रूप में प्रस्तुत किया गया है। फ़िल्म का संगीत इसकी एक बड़ी ताकत है। सुनील सोनी और अनुपमा मिश्रा की आवाज़ में गाए गीत बेहद मधुर हैं। विशेष रूप से “गोरी सपना हस की सीरतों…” गीत पहले ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय होकर वायरल हो चुका है।

फ़िल्म में संस्कृति के संजोने के प्रयास के अंतर्गत कर्मा नृत्य भी प्रस्तुत किया गया है। अभिनय की बात करें तो सभी कलाकारों ने सराहनीय कार्य किया है। खास तौर पर पूजा की सास पुष्पा के रूप में अंजलि सिंह और प्रेम के पिता के रूप में पुष्पेंद्र सिंह ने अपने किरदार को प्रभावशाली ढंग से निभाया है। फ़िल्म की अधिकतर शूटिंग कांकेर में हुई है, जो इसकी दृश्यात्मक सुंदरता को और बढ़ाती है। कहानी में सरप्राइज़ एलिमेंट भी है, जो दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है।हास्य को भी सहज अभिव्यक्ति के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया है जिसमें गोदना और झुमरू की अदाकारी ने जान डाल दी है । संवाद अदायगी में लघु संवादों ने अपना प्रभाव छोड़ा है ।कुल मिलाकर, “प्रेम रोग” एक पारिवारिक, मनोरंजक और सभी आयु वर्ग के दर्शकों के लिए उपयुक्त फ़िल्म है, जो दिल को छूती है और लंबे समय तक याद रहती है।फ़िल्म के प्रमुख क्रेडिट्स - निर्माता: आर्यन जैन, सह-निर्माता नवीन साहू, निर्देशक: संजय जैन, कार्यकारी निर्देशक: सनी सिन्हा, क्रिएटिव डायरेक्टर: क्रांति दीक्षितकहानी संजय जैन, मुख्य कलाकार अनिल सिन्हा, शालिनी विश्वकर्मा, पुष्पेंद्र सिंह, अंजली सिंह, अमन सागर, भूमि साहू, क्रांति दीक्षित, हेमलाल कौशल, धर्मेंद्र चौबे, संजय जैन, शैल दीक्षित, प्रभा जैन, मनोज वर्मा, लीची जैन, बेबी वर्षा, अनुपम वर्मा, सलीम अंसारीसंगीत सुनील सोनी, गायक:सुनील सोनी, अनुराग शर्मा, कंचन जोशी, अनुपमा मिश्रा,नितिन दुबे म्यूज़िक अरेंजर: प्रफुल्ल बेहरा, रिकॉर्डिंग: मिलन स्टूडियो, कटकवॉइस डबिंग: टी-सीरीज़ स्टूडियो, रायपुर,छायांकन (सिनेमैटोग्राफी): राज ठाकुर, संपादन: गौरांग त्रिवेदीसहायक संपादक: तुषार ठाकुर, लाइट: मित्तू खिरो, एक्शन: के. सतीश अन्ना, मेकअप: कमता नायक, लोकेश साहू, रश्मि, कॉस्ट्यूम्स: जीवन निषाद, शैल दीक्षित, प्रभा जैन, प्रोडक्शन मैनेजर: धनराज साहूवीएफएक्स: प्रवीर दास, पोस्टर: मंडल ग्राफिक्स, रायपुरडीआई कलरिस्ट: जैकी, जे.एस. स्टूडियो, मुंबई, आर्ट: अश्वनी जांगेल, स्टिल फोटोग्राफी: लक्ष्मी साहू हैं।








