शहर के उभरते प्रतिभाशाली युवा कवि ऋषिश मेहर

साहित्य - पथ में पहला कदम

रायगढ़ - - होनहार बिरवा के होत चिकनपात की उक्ति को चरितार्थ करने में कामयाब हो रहा शहर के उभरते युवा कवि ऋषिश मेहर जो महज 21 वर्ष की उम्र में अपने तमाम हृदय की भावनाओं को कलमबद्ध कर उसे "दिल से काग़ज़ तक हिंदी भाषा में और इंग्लिश भाषा में " what I couldn't speak I wrote लिखकर और उसे एक काव्य संग्रह पुस्तक का रुप देकर साहित्य - पथ में कदम रखते हुए अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा का परिचय दिया। यह दोनों किताबें इंक विजन प्रेस बिलासपुर छत्तीसगढ़ से प्रकाशित हुई है। जो विश्वस्तरीय अमेजॉन, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म और इंकविजन प्रेस में उपलब्ध है।

प्रतिभावान युवा कवि - - शहर के वरिष्ठ एलआईसी अभिकर्ता गोपाल मेहर और उनकी अर्द्धागिंनी श्रीमती शारदा देवी मेहर के ज्येष्ठ सुपुत्र हैं प्रतिभावान युवा कवि ऋषिश मेहर। माता - पिता से मिले उच्च संस्कार और ईश्वरीय प्रदत प्रतिभा के समावेश से युवा कवि ऋषिश भी बेहद अंतर्मुखी और अत्यंत ही सहज - सरल मिलनसार है साथ ही उसमें बेहद दूरदर्शिता का समावेश भी है। जो उनकी काव्य कृति के हर हर्फ़ से सुस्पष्ट होता है।

अभी तो पकड़ा हूँ कलम - - युवा कवि ऋषिश मेहर को बचपन से ही पढ़ाई के साथ - साथ साहित्य के प्रति बेइंतिहा लगाव है। शहर से इंटरमीडिएट की इम्तिहान के बाद वे दिल्ली यूनिवर्सिटी में दाखिल लिए हैं। जहाँ वे संप्रति बीकॉम फायनल ईयर के छात्र हैं। उन्होंने बड़ी विनम्रता से कहा कि हिंदी साहित्य और इंग्लिश साहित्य के प्रति मेरा गहरा आत्मिक लगाव है साथ ही अपनी भावनाओं को कलमबद्ध करना मुझे अच्छा लगता है। इसलिए अपनी कविताओं को एक पुस्तक रुप में देने का प्रयास किया हूँ। साहित्य जगत तो अनंत आकाश है प्रतिपल जितना भी जानें, समझें और लिखें यह भी कम है। अभी तो पकड़ा हूँ कलम बहुत कुछ जानना, समझना और लिखने के लिए प्रयास सतत करना है। साहित्य एक साधना है। जिसके प्रति समर्पित रहना मेरा कर्तव्य भी है। युवा कवि ऋषिश मेहर ने कहा हिंदी भाषा और इंग्लिश भाषा में लिखित मेरी भावनात्मक काव्य संग्रह किताब को युवा वर्ग के साथ-साथ साहित्य प्रेमी का भी आशीर्वाद, सुझाव और मार्गदर्शन मिलता रहेगा। जिससे मुझे और भी सीखने का सुअवसर मिलेगा साथ ही आत्मविश्वास में भी अभिवृद्धि होगी।

SK
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