रायगढ़ - - प्रख्यात साहित्यकार एवं कवि स्वर्गीय अंजनी कुमार 'अंकुर' की जन्म जयंती के अवसर पर 'अंकुर सदन' में एक सरस एवं भावपूर्ण काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में रायगढ़ के साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।वहीं कार्यक्रम का शुभारंभ माता सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया फिर अंजनी कुमार 'अंकुर' के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं उनके साहित्यिक अवदान को स्मरण करते हुए किया गया। कार्यक्रम के प्रारंभ में संचालक राघवेंद्र सिंह ने कहा - अंकुर जी का साहित्य समाज को संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों एवं सृजनशीलता की प्रेरणा देता है। उनकी रचनाएँ आज भी साहित्य जगत को दिशा प्रदान कर रही हैं। काव्य गोष्ठी में उपस्थित कवियों ने गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, छंद एवं समकालीन विषयों पर आधारित कविताओं का प्रभावशाली पाठ किया। कवियों ने प्रकृति, मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों एवं राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।इस अवसर पर डा. आशा मेहर 'किरण', मनोज श्रीवास्तव, साधना मिश्रा, दिव्या पाण्डेय, रश्मि वर्मा, नेमलता पटेल, स्वाति पड्या, रतन मिश्रा, जयंत यादव, धनेश्वरी धरा, स्वाति अवस्थी, डा. मनीषा अवस्थी, अरुणा साहू, सोनल श्रीवास, अजय सन्नाड्य, दुबे जी, शिवम डनसेना,सहित श्री अंकुर के परिवार एवं मित्रगण काव्य पाठ किये।
डा. आशा मेहर ने कहा कि स्वर्गीय अंजनी कुमार 'अंकुर' की स्मृति में आयोजित ऐसे साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने तथा सृजन की परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।वहीं मनोज श्रीवास्तव ने अंकुर के प्रगाढ़ संबंधो को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित किया। वही उनकी धर्मपत्नी राजकुमारी डनसेना और उनके पुत्र सत्यम डनसेना ने अंकुर जी की लिखी भावपूर्ण रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम के अंत में राजकुमारी डनसेना ने सभी साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। आत्मीय वातावरण में संपन्न यह काव्य गोष्ठी स्वर्गीय अंजनी कुमार 'अंकुर' को शब्दांजलि अर्पित करने का एक सफल एवं सार्थक प्रयास सिद्ध हुई।सफल संचालन का दायित्व हास्य व्यंग्य के कवि राघवेंद्र सिंह ने निभाया।








