साहित्यवाचस्पति लोचन प्रसाद पांडेय जयंती

रायगढ़ - - पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय जयंती के पावन अवसर पर विश्व हिन्दी अधिष्ठान के संस्थापक-संयोजक ,पूर्व प्राध्यापक हिन्दी किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ डॉ मीनकेतन प्रधान ने कहा कि पंडित लोचन प्रसाद पांडेय हिन्दी साहित्य के ऐसे देदीप्यमान साहित्यिक प्रकाश पुंज हैं जिनसे द्विवेदी युग का साहित्य आलोकित रहा।पाण्डेय जी का जन्म   4 जनवरी 1887 को तत्कालीन मध्यप्रदेश के बिलासपुर जिले में 4 जनवरी 1887 ई0 में हुआ था। महानदी के तट पर स्थित यह गांव अब जिला -सक्ती के अन्तर्गत है।उनकी पुण्य तिथि 18 नवम्बर,1959 ई. है । आपने अपने मूल गाँव बालपुर में रहकर तत्समय हिन्दी की उत्कृष्ट रचनाएँ की । बाद में अपनी कर्म भूमि के रूप में रायगढ़ में रहकर आजीवन साहित्य साधना में रत रहे ।हिन्दी ,ओड़िया, अंग्रेज़ी,छत्तीसगढ़ी, बांग्ला -आदि भाषाओं के उद्भट विद्वान के रूप में आप तत्समय साहित्य के क्षेत्र में बहुप्रतिष्ठित रहे । छायावाद के प्रवर्तक पद्मश्री पंडित मुकुटधर पाण्डेय के आप अग्रज और हमारे साहित्यिक पितामह हैं । पुरातत्त्ववेत्ता पं. लोचन प्रसाद पाण्डेय की 1906 में प्रकाशित ‘दो  मित्र’ प्रथम गद्य कृति है ।अन्य प्रमुख कृतियों में प्रवासी' , 'माधव मञ्जरी', 'कौशल रत्नमाला ,कविता कुसुम माला',  'नीति कविता' ,प्रेम प्रशंसा' , 'गृहस्थ-दशा दर्पण,मेवाड़ गाथा, 'साहित्यसेवा' , पद्य पुष्पांजलि'आदि हैं। वे 'भारतेंदु साहित्य मंडल ' के भी ये सदस्य रहे हैं । उनको  'काव्य विनोद' एवं 'साहित्य-वाचस्पति' की उपाधियों से विभूषित किया गया था। पंडित लोचनप्रसाद पांडेय के साहित्यिक अवदान को डॉ.बेठियार सिंह साहू, सौरभ सराफ,अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर, लिंगम चिरंजीव राव ,वसंत पंडा,  डॉ .ज्ञानेश्वरी सिंह , डॉ. सपना मिश्रा, डॉ.रोशनी मिश्रा  निर्भय राम गुप्ता, अर्चना पांडेय, पंकज रथ शर्मा, डॉ. श्रीमती विद्या प्रधान, सोनल श्रीवास,अमित सदावर्ती , लोचन गुप्ता, हरिशंकर गौरहा , जगदीश यादव , डॉ. सौदागर प्रसाद गुप्ता , प्रो. आर. के. पटेल , मनहरण सिंह ठाकुर तथा अधिष्ठान के अन्य साहित्यिकों ने रेखांकित किया है।

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