मीनकेतन प्रधान का उत्कृष्ट संयोजन आशा मेहर का सार्थक वक्तव्य रायगढ़ – – मीनकेतन प्रधान- संस्थापक विश्व हिन्दी अधिष्ठान न्यास रायगढ़ ,पूर्व प्राध्यापक किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय ने आज नीदरलैंड से रायगढ़ आये प्रवासी साहित्यकार मनीष कुमार पांडेय से अधिष्ठान की साहित्यिक- अकादमिक गतिविधियों पर गहन विमर्श किया। न्यासी डॉ. विद्या प्रधान ने विदेश संयोजक मनीष पांडेय की सक्रियता और साहित्यिक समर्पणशीलता को आगामी समय के लिए शुभ संकेत बताया। विमर्श के दौरान विदेश संयोजक डॉ . मौना कौशिक ( बुल्गारिया) के योगदान का भी स्मरण किया गया। इन दोनों प्रवासी साहित्यकारों के सहयोग से कई देशों में अधिष्ठान को विस्तार मिल रहा है । उनके द्वारा विश्व के विभिन्न देशों में हिन्दी भाषा साहित्य के प्रसार में अभूतपूर्व योगदान करते हुए भारत के अन्तर्राष्ट्रीय मैत्रेय सेतु को सशक्त बनाया जा रहा है। मनीष पांडेय ने अपनी सद्यः प्रकाशित काव्य कृति ‘नयी राह पर’ भेंट की । उन्हें अधिष्ठान की ओर से प्रकाशित आन्ध्रप्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार चिरंजीव राव की काव्य कृति ‘ जलियाँवाला बाग़ ‘ तथा लाला जगदलपुरी साहित्य सम्मान से सम्मानित बिलासपुर के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनोद कुमार वर्मा के कहानी संग्रह ‘ मछुआरे की लड़की ‘ की प्रति भेंट की गई । इसे मनीष पांडेय ने इस अंचल की साहित्यिक परंपराओं की महत्वपूर्ण उपलब्धि कहा।उनसे आगामी नवंबर -दिसंबर में अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन सहित अधिष्ठान द्वारा प्रकाशित संग्रहों के लोकार्पण की भी चर्चा की गई ।

इस अवसर पर अधिष्ठान कार्यालय में काव्य वाटिका संचालक मंडल साहित्यकार अध्यक्ष डॉ. आशा मेहर , डॉ. सुधा देवांगन , मनोज श्रीवास्तव, ईश्वर प्रसाद यादव, स्वाति पंडया ने प्रवासी साहित्यकार मनीष पांडेय का शाल श्रीफल से सम्मान किया गया तथा अभिनंदन पत्र भेंट किया गया । डॉ. सुधा देवांगन ने सम्मान आयोजन का संचालन करते हुए काव्य वाटिका के उद्देश्यों और साहित्यिक गतिविधियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। इस अवसर पर डॉ. आशा मेहर ने मनीष पांडेय के सम्मान को काव्य वाटिका की ओर से प्रथम बार किसी प्रवासी साहित्यकार के सम्मान की गौरवशाली उपलब्धि बताया । उन्होंने विदेश में रहने वाले इस साहित्यकार के साहित्यिक प्रदेय का उल्लेख करते हुए भारतीय जन भावना के वैश्विक विस्तार पर अपने महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किया । तत्पश्चात मनीष पांडेय ने काव्य वाटिका के साहित्यकारों के प्रति आभार प्रकट करते हुए साहित्य के क्षेत्र में रायगढ़ प्रवास को यादगार बताया । इस साहित्यिक यात्रा में उनकी सहधर्मिणी श्रीमती रश्मि पांडेय की विशेष उपस्थिति रही। आशुतोष तिवारी ने तकनीकी व्यवस्था में अपेक्षित सहयोग किया।

आयोजन के द्वितीय चरण में मीनकेतन प्रधान की अध्यक्षता में काव्य पाठ हुआ । सर्व प्रथम मनीष पांडेय ने अपने जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और प्रवासी जीवन की यात्रा पर प्रकाश डाला । उन्होंने अपनी सद्य: प्रकाशित काव्य कृति ‘ नयी राह पर ‘ से कविता का पाठ किया। जिसकी पंक्तियां हैं – ‘कालिमा जली ना मन की ,होली हर वर्ष जलाते हैं । ‘ इस कविता के साथ ही उन्होंने ‘ तुम बसे आज भी हो मेरे गीत में ‘ तथा छत्तीसगढ़ी कविता – ‘परदेशी’ का पाठ किया । तत्पश्चात वरिष्ठ साहित्यकार ईश्वर प्रसाद यादव ने अपने इस मनमोहक गीत से श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया -“ भाव हृदय में जब भी उमड़ते ,खो जाता भावों बीच मीत,उर की बात को मुँह तक ला कर ,गा लेता हूँ अपना गीत।” इसी कड़ी में डॉ आशा मेहर ने साग सब्जी पर आधारित लोक जीवन की भावनाओं को अपनी छत्तीसगढ़ी कविता में व्यक्त किया- “ आलू मुनगा बरी साग ला,फर धनिया ला डारे हे, गली खोर मा गमकत हावय, सुग्घर भूंजा बघारे हे॥कवयित्री साधना मिश्रा ने प्रकृति विषयक रचना का पाठ कर जीवन सत्य को उजागर किया- “ हुआ प्रभात नयन उन्मिलित , किसने गाये ये प्रभाती गीत।” तत्पश्चात स्वाति पंडया ने जीवन को एक रंगमंच मानते हुए दार्शनिक मनोभाव से यह कविता पढ़ी-“जीवन एक विशाल रंगमंच है,जहां आते हैं अनगिनत पात्र ,अपने अपने किरदार लिये,कुछ मुखर कुछ मौन। “काव्य पाठ की अंतिम कड़ी के रूप में डॉ. सुधा देवांगन ने अपने सुमधुर गीत से सबका मन मोह लिया- “ बारी बखरी छछलथे, नदिया-नदिया उछलथे,उछलके मनखे के मन , आये हे ए करिया घन॥
काव्य पाठ के अंत में मीनकेतन प्रधान ने अपनी कविताओं का पाठ किया। मनोज श्रीवास्तव ने अपनी रचनाएं सुनाते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।इस आयोजन के लिए प्रो. आर. के. पटेल, डॉ. बेठियार सिंह साहू ,चिरंजीव राव , डॉ. विनोद कुमार वर्मा, डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह, डॉ. सौरभ सराफ, पंकज रथ शर्मा, जगदीश यादव , अमित सदावर्ती, हरिशंकर गौराहा, लोचन गुप्ता ने बधाई दी है ।



