इप्टा के आयोजन में एसएसपी शशिमोहन सिंह की रहेगी ख़ास मौजूदगी
रायगढ़ - - हिंदी पट्टी के बेहद चर्चित नाटककार वरिष्ठ रंगकर्मी अख़्तर अली द्वारा 2002 में लिखे गये नाटक "असमंजस बाबू की आत्मकथा" का मंचन 9 जून मंगलवार को पाॅलिटेक्निक ऑडिटोरियम में होगा। नाट्यमंचन के दौरान रायगढ़ के डीआईजी एसएसपी शशिमोहन सिंह ख़ासतौर पर मौजूद रहेंगे, ग़ौरतलब है कि शशिमोहन सिंह ख़ुद एक परिपक्व अभिनेता, लेखक और निर्देशक हैं साथ ही बेहद संवेदनशील इंसान हैं लिहाज़ा उनकी मौजूदगी मात्र से रंग-आयोजन की गरिमा बढ़ेगी।

एक पात्रीय नाटक "असमंजस बाबू की आत्मकथा" आज के मशीनी हो चुके तेज़ रफ़्तार सरपट दौड़ते दौर में मानवीय संवेदना को केंद्र में रखकर बात करता है। यह नाटक मूलत: सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की कविताओं,अमृता प्रीतम का कहानियों, ओशो की टिप्पणियों का कोलाज़ है, हर मुद्दे पर अपनी साफ़गोई की वजह से समाज में अलग थलग पड़ चुके असमंजस बाबू और अकेलापन दूर करने पाले गये कुत्ते के बीच मानवीय संवेदना भरे रिश्ते की कहानी दर्शकों को हंसाती है, आश्चर्यचकित करती है और रुलाती भी है, ख़ासकर तब जब वही कुत्ता समाज को नई दिशा देने वाले असमंजस बाबू को सही राह दिखाता है।

एकल नाटक में असमंजस बाबू का क़िरदार रंगकर्मी पत्रकार युवराज सिंह "आज़ाद" निभाते हैं, इस नाटक को 2003 में इप्टा के डायरेक्टर अजय आठले ने अपनी गहरी निर्देशकीय सूझबूझ के साथ तैयार करवाया था, नाटक के दौरान मंच व्यवस्था भरत निषाद, कला निर्देशक टिंकू देवांगन और ध्वनि प्रकाश परिकल्पना संचालन श्याम भाऊ देवकर और प्रचार प्रसार राजेश जैन संभालेंगे। इस नाट्यमंचन में मुनादी डाट काॅम भी स्व स्फ़ूर्त सहयोगी संस्था बनी है। देश प्रदेश के कई छोटे बड़े शहरों सहित स्थानीय प्रस्तुतियों को मिलाकर अब तक 45 सफल मंचन हो चुके हैं। एकल नाटक "असमंजस बाबू की आत्मकथा" के लगातार दो शो शाम पांच बजे और शाम सात बजे पाॅलिटेक्निक ऑडिटोरियम में होने हैं, प्रवेश निःशुल्क है, इप्टा रायगढ़ ने सभी नाट्यप्रेमियों को आमंत्रित किया है।









