होली पर लगेगा चंद्रमा को ग्रहण

कब होगा होलिका दहन 2 या 3 मार्च ? डॉ० सुमंत शर्मा, ज्योतिष विशेषज्ञ

रायगढ़ - - हमारे देश भारत में होली का इंतजार सिर्फ रंगों के लिए नहीं, बल्कि उस खुशियों के माहौल के लिए होता है जो हर गली-मोहल्ले और बाजारों में देखने को मिलता है। इस बार होली की तारीख को लेकर लोगों में बहुत भ्रम पैदा हो रहा है। इस विषय को लेकर सुप्रसिद्ध ज्योतिषी डॉ० सुमंत शर्मा ने बताया कि आगामी 3 मार्च की शाम को चंद्रग्रहण लग रहा है। यह चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 06 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जो कि भारत में भी दिखाई देगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है, जिसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते। अतः 3 मार्च की शाम को लगने जा रहे इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 बजे तक रहेगा। और इस दिन पूर्णिमा तिथि शाम को 5 बजकर 7 मिनट तक रहेगी। ऐसे में 3 मार्च को होलिका दहन नहीं किया जा सकता।

होलिका दहन सूर्यास्त के बाद उत्तम - - उन्होंने बताया कि हमारे शास्त्रों व निर्णयसिंधु के मुताबिक होलिका दहन के लिए कुछ खास बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक होता है। जैसे होलिका दहन करते समय पूर्णिमा तिथि का होना सबसे जरूरी है और होलिका दहन सूर्यास्त के बाद करना ही उत्तम माना गया है।  उस समय भद्रा भी नही लगी हुई होनी चाहिए या उस वक़्त भद्रा काल अपने चरम पर भी ना हो। ​ज्योतिषाचार्य डॉ० सुमंत शर्मा ने पंचांग की गणनाओं का हवाला देते हुए बताया कि ​कलकत्ता के समयानुसार इस वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा 2 मार्च की शाम को 5.55 pm पर लग जाएगी, जो 3 मार्च को 5.07 pm तक रहेगी। लेकिन जैसे ही पूर्णिमा तिथि प्रारंभ होगी उसी समय 5.55 pm पर भद्रा काल शुरू हो जाएगा, जो 03 मार्च की सुबह 5.28 am तक रहेगा। और शास्त्रानुसार भद्रा काल में दहन वर्जित होता है, क्योंकि यह अनिष्टकारी माना जाता है। लेकिन वहीं हमारे शास्त्रों में एक प्रावधान है कि अगर भद्रा मध्यरात्रि के बाद तक रहती है और दहन के लिए समय नहीं बचता, तो आपातकालीन स्थिति में 'भद्रा पूंछ' के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। ऐसे में भद्रा के पूंछ के समय शुभ कार्य किए जा सकते हैं। इसलिए 2 मार्च की रात 12:50 am बजे से 2:02 am बजे के बीच होलिका दहन का शुभ समय रहेगा। और 3 मार्च को सूर्योदय कालीन पूर्णिमा रहेगी और इस दिन सूर्योदय से 6.20 am तक (चन्द्रग्रहण का सूतक लगने से पहले) पूर्णिमा तिथि का स्नान-दान, कुलदेवता पूजन आदि की परंपरा निभाई जा सकती है। सूतक और चंद्र ग्रहण के कारण 3 मार्च को रंगों वाली होली नहीं मनाई जाएगी। ज्योतिर्विद डॉ० सुमंत शर्मा के अनुसार चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। जो 04 मार्च को पड़ रही है। ​ऐसे में 4 मार्च को रंगों की होली खेलना चाहिए। जबकि 02 मार्च की देर रात को होलिका दहन संपन्न करना ही शुभ रहेगा।

SK
previous arrow
next arrow
rising
previous arrow
next arrow

Most Popular

You cannot copy content of this page