पं. मुकुटधर पाण्डेय जयंती के अवसर पर डॉ. मीनकेतन प्रधान की दो काव्य कृतियों का हुआ विमोचन

अंतर्राष्ट्रीय काव्य पाठ संपन्न        

 रायगढ़--- विश्व हिंदी अधिष्ठान, रायगढ़, छत्तीसगढ़, भारत तथा देवम फाउंडेशन कला एवं संस्कृति संस्थान, बुल्गारिया, यूरोप के संयुक्त तत्वावधान में छायावाद के प्रणेता प्रसिद्ध कवि पंडित मुकुटधर पांडेय जयंती के अवसर पर 30 सितंबर 2025 को डॉ. मीनकेतन प्रधान पूर्व प्राध्यापक किरोड़ीमल  शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ की दो काव्य कृतियों- करु कविताएँ तथा पिता संग्रह के  विमोचन सहित अंतर्राष्ट्रीय काव्य पाठ का गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम स्थल हाउसिंग बोर्ड, रायगढ़, छत्तीसगढ़ स्थित अधिष्ठान के संस्थापक-संयोजक निवास सह कार्यालय में  मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विनय कुमार पाठक, कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज, बिहार तथा छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एवं क्षेत्र के कई प्रसिद्ध साहित्य मनीषी राघवेन्द्र दुबे ,रमेशचन्द्र श्रीवास्तव (पूर्व आई एस .एस.),शत्रुघ्न जेसवानी साद,राम निहोरा राजपूत ,शीतल प्रसाद पाटनवार  बिलासपुर की गरिमामयी उपस्थिति रही कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. करूणा पाण्डेय, लखनउ ने आभासी पटल के माध्यम से की। कार्यक्रम की सह मेजबान डॉ. मौना कौशिक, बुल्गारिया तथा मनीष पांडेय नीदरलैंड सहित आयोजन में कैनेडा अमेरिका, जापान, कतर दोहा, सिंगापुर, बुल्गारिया जैसे कई देशों से प्रवासी भारतीय साहित्यकारों एवं दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, आंध्रप्रदेश, उड़ीसा आदि प्रदेशों के साहित्य प्रेमियों एवं अधिष्ठान से जुड़े सुधी साहित्यिकों की उत्साहजनक ऑनलाईन सहभागिता रही।

अधिष्ठान द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि कार्यक्रम स्थल पर मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक, राघवेन्द्र दुबे, रमेश चन्द्र श्रीवास्तव, शत्रुघ्न जैसवानी साद,रामनिहोरा राजपूत,शीतल प्रसाद पाटनवार एवं डॉ. विद्या प्रधान तथा स्वयं डॉ.मीनकेतन प्रधान आदि द्वारा सर्वप्रथम विद्या की अधिष्ठात्री माता सरस्वती और पं. मुकुटधर पाण्डेय के छायाचित्र के समक्ष द्वीप प्रज्ज्वलन किया गया तथा पं. मुकुटधर पाण्डेय को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। तत्पश्चात प्रसिद्ध कवयित्री वन्दना कुँवर रायजादा (प्रसिद्ध कवि कुँअर बेचैन की पुत्री)द्वारा सस्वर सरस्वती वन्दना की गई। वहीं अगले क्रम में डॉ. मौना कौशिक द्वारा कार्यक्रम में ऑफलाईन एवं ऑनलाईन माध्यम से जुड़े समस्त साहित्य अभिरूचि सम्पन्न सहभागियों का स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया गया।तत्पश्चात् आयोजक मण्डल की ओर से डॉ. विद्या प्रधान एवं डॉ. मीनकेतन प्रधान द्वारा अभ्यागतों का पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र के साथ स्वागत अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर साहित्य मनीषी डॉ. विनय कुमार पाठक एवं अन्य आगंतुक साहित्यकारों द्वार प्रत्यक्षतः डॉ. मीनकेतन प्रधान की काव्य कृति द्वय  “करू कविताएँ ’ तथा ‘पिता’ संग्रह का विमोचन किया गया । मुख्य अतिथि डॉ. विनय कुमार पाठक ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में पं. मुकुटधर पाण्डेय के साहित्यिक अवदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।उन्होंने डॉ. मीनकेतन प्रधान की विमोचित काव्य कृतियों के लिए बधाई दी और कृतियों की विषय वस्तुओं पर भी प्रकाश डाला ।उन्होंने वर्तमान सामाजिक, सांस्कृतिक परिवेश में इन पुस्तकों की  उपयोगिता को रेखांकित किया । इस क्रम में डॉ. बेठियार सिंह साहू, डॉ. रमेश कुमार टण्डन, अनुज कुमार तिवारी, मनीष कुमार पाण्डेय (नीदरलैंड)के सारगर्भित वक्तव्य हुए। मनीष पांडेय ने पं. मुकुटधर पाण्डेय के साहित्यिक प्रदेय पर प्रकाश डाला तथा  डॉ. मीनकेतन प्रधान को उनकी काव्य कृतियों के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। रमेशचन्द्र श्रीवास्तव ने छायावाद के संदर्भ में मुकुटधर पाण्डेय के महत्त्व को अक्षुण्ण बताया ।कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. करूणा पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में आयोजन की उपादेयता को निरुपित करते हुए मुकुटधर पांडेय के साहित्य की विशेषताओं पर प्रकाश डाला ।उन्होंने मीनकेतन प्रधान की रचनाओं की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उसके महत्त्व का निरुपण किया । इस सत्र का मंच संचालन प्रो. सौरभ सराफ, दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. बेठियार सिंह साहू, जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा बिहार ने किया । दूसरे सत्र में अंतर्राष्ट्रीय काव्यपाठ का रोचक आयोजन हुआ ।जिसके अंतर्गत भारतवर्ष के विभिन्न प्रान्तों एवं विदेशों से कई रचनकारों ने अपनी कविताओं का पाठ किया। इन कवियों में सर्व सम्माननीय डॉ. वीणा विज ‘उदित’ अमेरिका, प्रो.  सुदेश मोदगिल जापान, डॉ. स्नेह ठाकुर कैनाडा, श्रीमती प्रतिमा सिंह सिंगापुर, श्रीमती अनुसूया साहू सिंगापुर, सुश्री शालिनी वर्मा दोहा कतर सहित देश के विभिन्न प्रान्तों से सुधी कवियों की सहभागिता रही। छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों से श्री राघवेन्द्र दुबे, श्री शत्रुघ्न जैसवाल साद, श्री रामनिहोरा राजपूत, शीतल प्रसाद पाटनवार, श्रीमती चन्द्रिका दास वैष्णव ने गीत, गजल आदि का पाठ किया वहीं विजय कुमार तिवारी ओडिशा , विभा रानी श्रीवास्तव पटना,  लिंगम चिरंजीव राव आन्ध्र प्रदेश, प्रमोद झा मुरादाबाद, डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह पुणे, डॉ. इन्दु सिंह हैदराबाद, डॉ.राजेश कुमार मध्यप्रदेश,वंदना कुँअर ग़ाज़ियाबाद, राजेन्द्र चतुर्वेदी,सोनिया सैरिम ,डॉ.रामायण प्रसाद टंडन ने काव्यपाठ किया।तत्पश्चात् डॉ. करूणा पाण्डेय, लखनऊ ने काव्यपाठ सह अध्यक्षीय उद्बोधन प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए इस तरह के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया ताकि नए रचनाकारों का मार्ग प्रशस्त हो सके और समाज के लिए कल्याणकारी साहित्य की श्री वृद्धि हो सके। डॉ. रमेश कुमार टण्डन ने कविता पाठ सह अत्यंत सुरिूचिपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होने प्रत्येक कवि की कविता के शीर्षक व विषयवस्तु पर टिप्पणियॉं कीं। सत्र का मंच संचालन स्वयं अधिष्ठान के संस्थापक संयोजक डॉ. मीनकेतन प्रधान ने अपनी रोचक व विद्वत्तापूर्ण भाषा शैली में करते हुए कार्यक्रम में वास्तविक व आभासी पटल से जुडे़ सहभागियों को बॉंधे रखा। अंत में उन्होने सभी साहित्यानुरागियों से इसी तरह सुरूचिपूर्ण सक्रिय सहभागिता की उम्मीद जताते हुए उन्हें पुनः साधुवाद दिया। कार्यक्रम के संपूर्ण आयोजन में डॉ. विद्या प्रधान के अथक परिश्रम की अहम भूमिका रही। साथ ही तकनीकी सहयोगियों में प्रमुख रूप से डॉ.ज्ञानेश्वरी सिंह ,डॉ,सुमित दुबे,अमित सदावर्ती,अक्षय गुप्ता,दीपक ,लोचन गुप्ता,ने उल्लेखनीय भूमिका निभाई जिनकी सक्रियता से साढ़े पॉंच घण्टे तक कार्यक्रम अबाध रूप से जारी रहा। डॉ.मीनकेतन प्रधान को उनकी काव्य -कृतियों के लिए वीणा विज उदित , विभा रानी श्रीवास्तव, डॉ.शिप्रा सक्सेना ,  डॉ.मृदुल कीर्ति,डॉ.दीपक पाण्डेय, डॉ.स्नेह ठाकुर ,डॉ. ऋतु शर्मा अनन पांडे ,प्रो.आर.के. पटेल,  चन्द्रकिशोर सिंह,वाई.के.पंडा,  बनवारी लाल देवांगन , विजय कुमार तिवारी,लिंगम चिरंजीव राव , मोहन पटेल , हरिशंकर गौराहा,रविशंकर मिश्रा डॉ.राजेश दुबे ,डॉ.रोशनी मिश्रा,डॉ,सत्यभामा आडिल , डॉ.उर्मिला शुक्ल , शशांक शर्मा ,आदि साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने इस अवसर पर बधाई दी है ।

SK
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