बच्चों को मिला प्रकृति से जुड़ने सीखने का सुअवसर
रायगढ़ – – शासकीय प्राथमिक शाला गोवर्धन पुर में किचन गार्डन के लिए स्कूली बच्चों के साथ शिक्षिका श्रीमती रीता श्रीवास्तव ने बताया कि किचन गार्डन की उपयोगिता एवं आवश्यकता क्यों है। वहीं किचन गार्डन विद्यालय परिसर में बच्चों द्वारा सब्जियाँ, फल, औषधीय पौधे तथा फूल उगाने की एक उपयोगी गतिविधि है। इससे बच्चों को प्रकृति और खेती से सीधे जुड़ने का अवसर मिलता है। किचन गार्डन केवल पौधे उगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास में भी सहायक है।प्रकृति से जुड़ाव बच्चे पौधों को लगाना, पानी देना, निराई-गुड़ाई करना और उनकी देखभाल करना सीखते हैं। व्यावहारिक ज्ञान – बच्चों को बीज, मिट्टी, खाद, सिंचाई और पौधों की वृद्धि की प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव मिलता है।पोषण एवं स्वास्थ्य-किचन गार्डन में उगाई गई ताजी और पौष्टिक सब्जियों के महत्व को बच्चे समझते हैं और संतुलित आहार के प्रति जागरूक होते हैं।जिम्मेदारी की भावना-पौधों की नियमित देखभाल करने से बच्चों में जिम्मेदारी, अनुशासन और सहयोग की भावना विकसित होती है।पर्यावरण संरक्षण-
बच्चे पेड़-पौधों के महत्व, जैव-विविधता, जैविक खाद और पर्यावरण संरक्षण के बारे में सीखते हैं। आत्मनिर्भरता-बच्चों को कम संसाधनों में सब्जियाँ उगाने की जानकारी मिलती है, जिससे उनमें आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ती है। शैक्षणिक उपयोगिता-किचन गार्डन का उपयोग विज्ञान, गणित, पर्यावरण अध्ययन और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को गतिविधि आधारित तरीके से समझाने में किया जा सकता है। श्रम के प्रति सम्मान- बच्चे स्वयं पौधों की देखभाल करके मेहनत और श्रम के महत्व को समझते हैं तथा श्रम करने वाले लोगों के प्रति सम्मान विकसित करते हैं।
वहीं उन्होंने कहा कि किचन गार्डन विद्यालय के लिए एक जीवंत शिक्षण प्रयोगशाला की तरह है। इससे बच्चों में प्रकृति-प्रेम, स्वास्थ्य जागरूकता, जिम्मेदारी, सहयोग और आत्मनिर्भरता जैसे गुण विकसित होते हैं। इसलिए प्रत्येक विद्यालय में बच्चों की सहभागिता से किचन गार्डन विकसित करना उपयोगी कार्य है। इसी क्रम में बच्चों के उत्साह वर्धन स्वरूप शिक्षिका रीता श्रीवास्तव ने बच्चों को स्वयं के व्यय से फुटबॉल, कैरम, लूडो जैसे खेल सामग्री बांट कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया।







