रायगढ़ - - मीनकेतन प्रधान पूर्व प्राध्यापक हिन्दी किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ की भागीदारी रायपुर साहित्योत्सव प्रथम दिवस विगत 23 जनवरी को ‘ छत्तीसगढ़ का साहित्यिक अवदान ‘ विषयक सत्र में वक्ता के रूप में हुई । इसमें मंचासीन प्रतिष्ठित साहित्यकार अरुण कुमार निगम,माणिक विश्वकर्मा, सरला शर्मा,सूत्रधार डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा सहित डॉ. चित्तरंजन कर , लिंगम चिरंजीव राव, डॉ.श्रीमती विद्या प्रधान,पंकज रथ शर्मा ,चन्द्रिका दास वैष्णव ,सोनल मावतवाल श्रीवास ,बनवारी लाल देवांगन,डॉ.रमेश कुमार टंडन ,डॉ.रुक्मिणी सिंह राजपूत ,साधना मिश्रा ,राजकमल भारती, रामभजन पटेल,जानकी साव ,तिलक साव की महत्वपूर्ण उपस्थिति रही।

मीनकेतन प्रधान ने अपने वक्तव्य में छत्तीसगढ़ के हिन्दी-छत्तीसगढ़ी साहित्य के रचनाकारों के योगदान को प्राचीन साहित्यिक परम्पराओं से लेकर आज तक के समय में राष्ट्रीय स्तर पर सर्वोच्च भूमिका होने का उल्लेख किया।उन्होंने हिन्दी साहित्य के विकास क्रम में प्राचीनकालीन काव्य साधकों सहित आधुनिक युग में भारतेन्दु हरिश्चंद्र के समकालीन कवि जगमोहन सिंह ठाकुर (शिवरी नारायण) के मंडल से सम्बन्धित बालपुर के पांडेय बंधु पुरुषोत्तम प्रसाद पांडेय, लोचन प्रसाद पाण्डेय, मुकुटधर पांडेय तथा बिलासपुर रायपुर क्षेत्र के कवियों का स्मरण किया । सन् 1900 के आसपास से छत्तीसगढ़ की राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना का विशेष महत्त्व साहित्य में रहा ।इसमें जगन्नाथ प्रसाद भानु ,ठाकुर प्यारे लाल , पदुमलाल पुन्नालाल बख़्शी,कोदू राम दलित , श्यामलाल चतुर्वेदी, मुकुन्द कौशल आदि की साहित्यिक चेतना को उजागर किया गया।

उन्होंने हिन्दी के क्षेत्र में मुकुटघर पांडेय ,गजानन माधव मुक्तिबोध,प्रमोद वर्मा, नरेंद्र देव वर्मा, विनोद कुमार शुक्ल आदि के काव्य सहित आलोचना के क्षेत्र में अवदान को युगान्तरकारी बताया। मीनकेतन प्रधान के इस वक्तव्य के लिए डॉ.वीणा विज उदित (प्रवासी साहित्यकार अमेरिका)डॉ.बेठियार सिंह साहू, मनीष पांडेय (प्रवासी साहित्यकार नीदरलैंड),डॉ.मौना कौशिक , प्रवासी साहित्यकार बुल्गारिया) निर्भय राम गुप्ता,डॉ.राजेश दुबे,अमित सदावर्ती,डॉ,सीमा प्रधान ,डॉ.ज्ञानेश्वरी सिंह,जगदीश यादव ,अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर,सौरभ सराफ हीना पटेल ,वैजयंती पटेल,विकास कुमार सिंह,हरिहर मालाकार, हरिशंकर गौराहा,लोचन गुप्ता आदि ने बधाई दी है ।








