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देशभक्ति की कविताओं से गूंजा वृंदावन हाल, काव्य संध्या में बिखरे राष्ट्रप्रेम के रंग

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सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सफल काव्य संध्या का आयोजन

रायगढ़ – – सद्भावना साहित्य संस्थान द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर विगत 16 अगस्त को वृंदावन हॉल, सिविल लाइन रायपुर में देशभक्ति पर आधारित काव्य संध्या का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता योगेश शर्मा ‘योगी’ ने की तथा मुख्यअतिथि के रूप में लक्ष्मी नारायण लाहोटी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रचनाकारों ने सहभागिता की और देशप्रेम से ओतप्रोत अपनी रचनाओं का काव्य पाठ किया। वीरता, राष्ट्रप्रेम, तिरंगे और देश की एकता से जुड़ी कविताओं ने उपस्थित श्रोताओं में उत्साह और देशभक्ति की भावना का संचार किया। काव्य पाठ के दौरान पूरा सदन वंदेमातरम के स्वर से गूंजता रहा।

काव्य संध्या का शुभारंभ सामूहिक रूप से वंदेमातरम गान से हुआ। आयोजन में रचनाकारों को तीन समूहों में विभाजित किया गया था, जिनके समूह संचालक राजेन्द्र रायपुरी, रुनाली चक्रवर्ती और छबिलाल सोनी रहे। प्रत्येक समूह से चयनित एक रचनाकार को श्रेष्ठ काव्य पाठ हेतु सम्मानित किया गया, जिनमें महेंद्र कुमार, आरव शुक्ला और श्रीमती दीपमाला शामिल रहे। वहीं समूह संचालकों का भी सम्मान किया गया।

काव्य संध्या में रचनाकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से देशप्रेम, तिरंगे, शहीदों के बलिदान और राष्ट्र की एकता की भावनाओं को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। प्रस्तुत रचनाओं में से कुछ रचनाएं इस प्रकार रहीं—

कवि विवेक भट्ट “आशा परशुराम” की रचना—

कभी गाँव से जब गुज़रता तुम्हारे,
मुझे देखकर एक कोयल कुहुकती।
अचानक सभी पेड़ फूलों से लदते,
अचानक मेरी राह खुशबू से भरती।
वही राह तुमसे मुझे पूछ ले तो
उसे नाम मेरा बता तो सकोगी?
कभी स्वर्ग में जब मुलाक़ात होगी
तो तुम मुझसे नज़रें मिला तो सकोगी?

रूनाली चक्रवर्ती की रचना “तिरंगा”—

आज तिरंगा ये कहता है अपनी पूरी शान से,
हमें मिली आजादी वीर शहीदों के बलिदान से।
वन्दे मातरम्
गाँधी,तिलक,सुभाष,जवाहार का प्यारा यह देश है ,
अनेकता में एकता का देता यह संदेश है ।
वन्दे मातरम्

सुषमा प्रेम पटेल की रचना—

धवल शांति का दूत विश्व में, शुभता का संदेश है।
’सुषमा’ सुंदर देश हमारा, सुखद हुआ परिवेश है।।
हरा रंग हरियाली लाए, जीवन का अभिमान है।
तीन रंग से बना तिरंगा, भारत की पहचान है।।
भारती जय भारती।
भारती जय भारती।।
जय-जय भारती, बोलो जय-जय भारती।।

योगेश शर्मा योगी की रचना—

मज़हब घरों में हो यह मंज़ूर होना चाहिए
घर की छतों पर तिरंगा ज़रूर होना चाहिए

आरव शुक्ला की रचना—

कांरवा देश भक्ति का कभी रुकने नहीं पाए
दुश्मन के नज़र इस देश पर उठने नहीं पाए
तीन रंगों की रक्षा में भले ही सर कटा दे हम
तिरंगा देश का लेकिन कभी झुकने नहीं पाए

इन रचनाओं के साथ अन्य रचनाकारों ने भी देशभक्ति से ओतप्रोत रचनाओं का पाठ किया। आयोजन की विशेषता यह रही कि प्रत्येक रचनाकार को काव्य पाठ के लिए पांच मिनट का समय दिया गया और रचनाकारों ने बिना किसी भूमिका के सीधे अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया। पूरे आयोजन के दौरान साहित्य और राष्ट्रप्रेम का अद्भुत संगम देखने को मिला तथा सदन लगातार वंदेमातरम के स्वर से गूंजता रहा।

समापन सत्र में लॉटरी सिस्टम द्वारा डॉ. गोपा शर्मा एवं आदित्य शुक्ला को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ हुआ।

अंत में वरिष्ठ पत्रकार नदीम मेमन ने कार्यक्रम की सफलता पर अपने विचार प्रकट करते हुए आयोजन की सराहना की तथा उपस्थित अतिथियों, रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार प्रकट किया।

सद् भावना साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित यह काव्य संध्या स्वतंत्रता दिवस की भावना को साहित्य और कविता के माध्यम से अभिव्यक्त करने वाला सफल एवं सार्थक आयोजन रहा। कार्यक्रम में उपस्थित रचनाकारों और साहित्यप्रेमियों ने आयोजन की सराहना की तथा इसे राष्ट्रप्रेम की भावना को जन-जन तक पहुंचाने वाला प्रेरणादायी प्रयास बताया।

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जनचर्चा सीजी डॉट इन
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