अन्य गतिविधियाँ

लोकगायिका कविता वासनिक की छत्तीसगढ़ी लोकगायन की रंगारंग प्रस्तुति से देर रात झूमते रहे दर्शक

नौवीं संध्या में कला, भक्ति और संगीत का दिखा अलौकिक संगम

रायगढ़ – – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह 2025 की नौवीं संध्या सुर, ताल, नृत्य और भक्ति रस के अद्भुत संगम से सराबोर रही। शाम 5 बजे से शुरू हुए इस कार्यक्रम में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सतना की कुमारी नित्या शर्मा के शानदार कथक नृत्य से हुई। इसके बाद सारंगढ़ की सुश्री यामी वैष्णव और रायगढ़ की सुश्री युग रत्नम ने भी अपनी कथक कला से दर्शकों का मन मोह लिया। दुर्ग के तरुण शर्मा और उनके शिष्य सहारवी सिंह एवं रीति लाल ने गणेश वंदना, देवी स्तुति और शिव पंचाक्षरी पर आधारित भक्तिमय कथक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में शास्त्रीय संगीत और लोक कला का भी अनुपम संगम देखने को मिला। वहीं कार्यक्रम में जब प्रोजेक्ट दिव्य धुन के दिव्यांग बच्चों ने सुरों से सजी अपनी प्रस्तुति दी, तो पूरा कार्यक्रम स्थल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। सुरों की इस जादुई धुन ने दर्शकों को भावुक कर दिया और यह साबित कर दिया कि हुनर की कोई सीमा नहीं होती। महाराष्ट्र के प्रसिद्ध कलाकार श्री राम बोरगांवकर ने तबला वादन और श्री मंगेश बोरगांवकर ने अपने गायन से दर्शकों का दिल जीत लिया। चेन्नई की श्रीमती गोपिका वर्मा ने मोहिनीअट्टम की प्रस्तुति से कार्यक्रम में समा बांध दिया, जबकि मुंबई के मोहित शास्त्री ने बांसुरी वादन की मधुर धुन से लोगों को भावविभोर कर दिया।नौवीं संध्या का समापन छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध लोक कलाकार श्रीमती कविता वासनिक के लोक रंग की प्रस्तुति से हुआ

। उनकी प्रस्तुति ने पूरे समारोह स्थल को संगीतमय कर दिया और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। चक्रधर समारोह की इस नौवीं संध्या में शास्त्रीयता, लोकभावना और भक्ति का अद्भुत मिश्रण देखने को मिला, जिसने भारतीय कला और संस्कृति की अनुपम छटा बिखेरी। वहीं कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने राजा चक्रधर सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। समारोह की विशेष कड़ी में साहित्यकार तेजराम नायक द्वारा रचित काव्य कृति ‘तेजाक्षरी’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर सांसद श्री सिंह ने कहा कि चक्रधर समारोह केवल शास्त्रीय संगीत और नृत्य की परंपरा का प्रतीक ही नहीं, बल्कि साहित्यिक योगदान को भी नई पहचान देता है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कला-प्रेमी, साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरा वातावरण शास्त्रीय संगीत, साहित्यिक विमर्श और सांस्कृतिक गरिमा से सराबोर रहा। नन्हीं नृत्यांगना नित्या शर्मा की कथक प्रस्तुति ने जीता सबका दिल–सतना मध्यप्रदेश की बाल कलाकार नित्या शर्मा ने चक्रधर समारोह 2025 के मंच पर अपनी कथक प्रस्तुति से विशेष पहचान बनाई। भगवान गणेश की वंदना से प्रारंभ हुई प्रस्तुति में भाव, लय और ताल का ऐसा समन्वय देखने मिला जिसने प्रस्तुति को खास बना दिया। चार वर्ष की आयु से कथक का अभ्यास कर रही नित्या वर्तमान में उस्ताद अलाऊद्दीन खान संगीत महाविद्यालय सतना से माध्यमिक शिक्षा ले रही हैं।लगातार दो वर्षों तक के विध्य हुनर बाड़ा प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली इस बाल कलाकार की कला को देखकर दर्शकों ने भरपूर सराहना की, नित्या को भारतीय शास्त्रीय नृत्य की उभरती हुई प्रतिभा बताया।

कथक नृत्यांगना यामी वैष्णव और साथियों ने किया मनमोहक प्रदर्शन – – कथक बाल नृत्यांगना सुश्री यामी वैष्णव और साथियों ने अपनी अनुपम प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय, सारंगढ़ की छात्रा यामी मात्र चार वर्ष की उम्र से कथक साधना कर रही हैं। उन्हें कथक की शिक्षा अपनी गुरु माँ प्रीतिरुद्र वैष्णव एवं अंतरराष्ट्रीय कला गुरु पं. सुनील वैष्णव से मिली है। प्राचार्य एल डी वैष्णव के सानिध्य में रायगढ़ घराने की विशेष बोलो की बंदिशों और तालों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यामी ने मंच पर कथक नृत्य की गहन बारीकियों को प्रस्तुत किया। कथक नृत्य यामी को नृत्य आचार्य पंडित फिरतु महाराज जी की पांचवी पीढ़ी के रूप में विरासत से प्राप्त हुई है। कथक नृत्य जगत में रायगढ़ घराने की पहचान को आगे ले जाते हुए यामी को अब तक कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मान मिल चुका है। कम उम्र में ही उन्होंने देश के विख्यात राष्ट्रीय मंचों पर प्रथम स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कथक नृत्य कर युग रत्नम ने भाव, लय और ताल से सजाया मंच – – 14 वर्षीय राष्ट्रीय कथक नृत्यांगना सुश्री युग रत्नम ने शिव स्तुति की मनोहारी प्रस्तुति देकर दर्शकों का दिल जीत लिया। नृत्य की हर मुद्रा और भाव में भक्ति का गहन स्वरूप दिखाई दिया, जिसने वातावरण को शिवमय बना दिया। रायगढ़ घराने से संबंध रखने वाली युग रत्नम बचपन से ही कथक की साधना कर रही हैं। उन्हें प्रशिक्षण श्रीमती प्रीति वैष्णव एवं श्री रुद्र नारायण वैष्णव से प्राप्त हुआ है। वर्तमान में वे माँ वैष्णवी संगीत महाविद्यालय, सारंगढ़ की छात्रा हैं। युग यत्नम अब तक रायपुर, बिलासपुर और रायगढ़ सहित विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों के लिए पुरस्कृत हो चुकी हैं। विद्यालय और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं में भी उन्होंने अपनी विशेष पहचान बनाई है।

दुर्ग के गुरु तरुण शर्मा और उनकी शिष्याओं ने कथक की अनुपम प्रस्तुति से बांधा समां – – दुर्ग के सुप्रसिद्ध कथक नृत्याचार्य गुरु तरुण शर्मा और उनकी शिष्याएँ शारवी सिंह परिहार तथा रीति लाल ने भाव, मुद्रा, लय और भक्ति का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को गणेश, शिव और शक्ति की परम चेतना से जोड़ दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वमंगल मंगल्याय गणेश वंदना से हुई, जिसे स्वयं गुरु तरुण शर्मा ने प्रस्तुत किया। इसके बाद शारवी सिंह परिहार ने देवी स्तुति और रीति लाल ने शिव पंचाक्षरी स्तोत्र की प्रस्तुति दी। अंत में पंचतत्व से वशीभूत देवी स्तुति की समूहिक प्रस्तुति ने संध्या को भक्ति, लय और सौंदर्य के अद्वितीय संगम से सराबोर कर दिया। गुरु तरुण शर्मा, जिन्हें नृत्यर्थी कलास्तंभ, नृत्य कालाचार्य, कला विद्वान तथा नृत्य युवा प्रतिभा जैसी उपाधियाँ प्राप्त हैं, पिछले 15 वर्षों से नृत्ययोदया कथक स्कूल के माध्यम से कला साधना और प्रशिक्षण में निरंतर योगदान दे रहे हैं। उन्होंने नेपाल, बेंगलुरु, उदयपुर, कटक, भिलाई और दुर्ग सहित देश के अनेक नगरों में अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से व्यापक प्रशंसा अर्जित की है। शिष्या रीति लाल जिन्हें नृत्य कला रंजीता सम्मान और भारत शास्त्र नृत्य प्रवीणा जैसे विशिष्ट अलंकरण प्राप्त हैं, अपनी सशक्त अभिव्यक्ति और लयबद्धता के लिए जानी जाती हैं। वहीं शारवी सिंह परिहार को नृत्य नटरंग सम्मान, प्रणवम प्रतिभा अवार्ड, नृत्य मयूरी अवार्ड और मधु गुंजन अवार्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त हैं। उनकी साधना हर भाव और गति में स्पष्ट झलकती है। दर्शकों ने तालियों की गडग़ड़ाहट से कलाकारों का स्वागत कर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया।

प्रोजेक्ट दिव्य धुन के दिव्यांग बच्चों ने सुरों से जीत लिया दिल – – चक्रधर समारोह के मंच पर जब प्रोजेक्ट दिव्य धुन के दिव्यांग बच्चों ने सुरों से सजी अपनी प्रस्तुति दी, तो पूरा कार्यक्रम स्थल तालियों की गडग़ड़ाहट से गूंज उठा। सुरों की इस जादुई धुन ने दर्शकों को भावुक कर दिया और यह साबित कर दिया कि हुनर की कोई सीमा नहीं होती। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में प्रोजेक्ट दिव्य धुन के तहत दिव्यांग बच्चों का एक विशेष बैंड बनाया गया है, जिन्हें कला केंद्र रायपुर में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट ने उन बच्चों को नई पहचान दी है, जिनके लिए कभी मंच तक पहुँचना एक सपना था। हारमोनियम, तबला और सुर-साधना से अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रसिद्ध गायक राहुल ठाकुर ने भी अपने स्वरों से वातावरण को और अधिक मधुर व भावपूर्ण बना दिया। राहुल ठाकुर प्रोजेक्ट दिव्य धुन के संचालक हैं। जिला प्रशासन रायपुर के मार्गदर्शन में वे कला केंद्र का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। कोरबा में जन्मे राहुल का बचपन संगीत की धुनों में ही बीता। राहुल ने छोटे मंचों से शुरुआत की और आज 200 से अधिक बड़े आयोजनों में अपनी प्रस्तुति दे चुके हैं।

महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध तबला वादक डॉ.राम बोरगांवकर की लयकारी से मंत्रमुग्ध हुआ सभागार – – महाराष्ट्र के प्रख्यात तबला वादक डॉ. राम बोरगांवकर ने अपनी अनूठी प्रस्तुति से ऐसा समा बांधा कि पूरा सभागार तबले की थाप और स्वरलहरियों में डूब गया। बनारस तबला घराने की गौरवशाली परंपरा से जुड़े डॉ.बोरगांवकर ने अपनी सधी हुई उंगलियों से तबले पर गणेश स्तुति और बनारस घराने की विविध शैलियों में ऐसी प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ताल और लय की सटीकता का यह अद्भुत संगम चक्रधर समारोह की सांस्कृतिक यात्रा का एक स्वर्णिम अध्याय बन गया। प्रख्यात तबला वादक डॉ.राम बोरगांवकर बनारस के तबला सम्राट पंडित शारदा महाराज सहाय जी के पट्टशिष्य हैं। उन्होंने तालशास्त्र में पी.एच.डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्हें अब तक 3 राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ.बोरगांवकर ऑल इंडिया रेडियो के ए-ग्रेड आर्टिस्ट हैं और देश के प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में तबला सोलो प्रदर्शन कर चुके हैं। एक सफल वादक के साथ-साथ वे संगीत शिक्षा को भी समर्पित हैं। उन्होंने अनेक शिष्यों को तबले की तालीम दी है और वर्तमान में सरस्वती संगीत कला महाविद्यालय, लातूर तथा मराठवाड़ा संगीत कला अकादमी के अध्यक्ष के रूप में संगीत साधना को नई दिशा प्रदान कर रहे हैं।

प्रख्यात पाश्र्व गायक मंगेश बोरगांवकर का शास्त्रीय संगीत और भक्ति रस से सरोबार हुए दर्शक–महाराष्ट्र के प्रख्यात पाश्र्व गायक मंगेश बोरगांवकर ने अपनी मधुर वाणी में शास्त्रीय राग और भक्ति गीतों का ऐसा संगम प्रस्तुत किया कि पूरा सभागार सुर, लय और ताल की अद्भुत छटा में सराबोर हो गया। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत राग बागेश्वरी से की, जिसकी गहराई और माधुर्य ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद प्रस्तुत भजन बाजे रे मुरलिया बाजे… ने पूरे वातावरण को भक्ति रस से भर दिया। बाल्यकाल से ही संगीत साधना में रमे मंगेश बोरगांवकर ने अपनी सधी हुई गायन शैली और लयबद्धता से दर्शकों के हृदय को स्पंदित कर दिया। गौरतलब है कि बोरगांवकर देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर चुके हैं। उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। नवमी संध्या में उनकी प्रस्तुति ने न केवल समारोह की गरिमा को और बढ़ाया, बल्कि रायगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को भी नई ऊँचाई प्रदान की। चक्रधर समारोह में चला मोहिनीअट्टम का जादू – – चेन्नई की विख्यात नृत्यांगना गुरु गोपिका वर्मा ने मोहिनीअट्टम की मोहक प्रस्तुति दी। उनकी मनोहर मुद्राएँ और भावपूर्ण अभिव्यक्ति दर्शकों को केरल की शास्त्रीय नृत्य-परंपरा और अभिनय की आत्मा से रूबरू करा गईं। उन्होंने चित्रांगम, जमुना किनारे, विश्वेश्वरा रचनाओं पर आधारित प्रस्तुति में रसों को सजीव कर दिखाया। भक्ति और सौंदर्य से परिपूर्ण उनके नृत्य में कोमल गति, लयबद्ध ताल और सहज शैली का अद्भुत संगम देखने मिला। विशेषकर जमुना किनारे की संगीतमय लय में उनका भाव प्रवाह दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। कृष्ण और गोपियों के प्रसंगों को उन्होंने इतने जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। वहीं विश्वेश्वरा में भक्ति और आस्था का गहरा वातावरण रचा। गुरु गोपिका वर्मा का मोहिनीअट्टम से परिचय मात्र दस वर्ष की आयु में हुआ। प्रारंभिक शिक्षा उन्हें श्रीमती गिरिजा और श्रीमती चंद्रिका कुरुप से मिली। आगे चलकर प्रसिद्ध कल्याणी कुट्टिअम्मा, श्रीदेवी राजन और श्री कलामंडलम कृष्णन नायर के मार्गदर्शन ने उनकी कला को नई ऊँचाई दी और अभिनय में गहराई प्रदान की। उनकी प्रस्तुति ने सिद्ध किया कि मोहिनीअट्टम केवल नृत्य नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों और मानवीय भावनाओं का जीवंत उत्सव है।

मुंबई के सुविख्यात बांसुरी वादक मोहित शास्त्री की मधुर धुनों से गूंजा सभागार – – मुंबई से पधारे सुविख्यात बांसुरी वादक मोहित शास्त्री ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो उठा। शास्त्री ने शास्त्रीय रागों और पारंपरिक धुनों से कार्यक्रम की शुरुआत की। उनकी बांसुरी से निकली मधुर तानें सुर, ताल और लय का ऐसा संगम रच रही थीं कि दर्शक भावविभोर होकर झूम उठे। लोकधुनों को शास्त्रीय रंग में पिरोकर उन्होंने अपनी कला का अनूठा परिचय दिया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गडग़ड़ाहट से सराहा। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मैया मोरी मैं नहीं माखन खाओ, यशोमती मैया से बोले नंदलाला, श्याम तेरी बंसी पुकारे, दिल दीवाना, कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है, चल अकेला चल अकेला और डपली वाले डपली बजा जैसे भजनों और लोकप्रिय गीतों को बांसुरी की मधुर ध्वनियों से प्रस्तुत कर समां बांध दिया। दर्शक भी भावनाओं में डूबकर धुनों के साथ गुनगुनाने लगे, जिससे वातावरण भक्तिरस और सुरमय आनंद से गूंज उठा। बता दे कि मोहित शास्त्री को संगीत साधना की प्रेरणा बचपन में अपनी दादी और पिता से मिली। बचपन में ही उन्हें बांसुरी से गहरा लगाव हुआ और धीरे-धीरे यह उनका जीवन का साधन और साध्य बन गया। आज वे देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय संगीत की गरिमा को बढ़ा रहे हैं और कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं। चक्रधर समारोह की इस संध्या में उनकी टीम ने भी उत्कृष्ट संगति दी, जिससे प्रस्तुति और भी प्रभावशाली बन पड़ी। बांसुरी की गूंज और तालियों की प्रतिध्वनि से पूरा समारोह स्थल देर तक सराबोर रहा।

कविता वासनिक के छत्तीसगढ़ी लोकगायन की रंगारंग प्रस्तुति से देर रात झूमते रहे दर्शक – – चक्रधर समारोह 2025 की नवमी संध्या में छत्तीसगढ़ की प्रख्यात लोकगायिका कविता वासनिक ने अपनी सुरीली आवाज और लोकधुनों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। लोकगायिका कविता वासनिक और उनकी टीम अनुराग धारा परिवार ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की मनमोहक प्रस्तुतियां देते हुए छत्तीसगढ़ महतारी और माटी के प्रति गहरा भाव प्रकट किया। कार्यक्रम का आगाज गणेश स्तुति और नवदुर्गा गीतों से हुआ, जिसके बाद उन्होंने लोकजीवन की झलक दिखाते हुए गाड़ी वाला रे.., हरेली गीत, ददरिया बखरी के तुमा नार.., कर्मा गीत महुआ झरे, चौरा म गोंदा.., ददरिया और छेरछेरा, पता दे जा रे-पता ले जा रे गाड़ी वाला जैसे लोकप्रिय गीत प्रस्तुत किए। वहीं कविता वासनिक की लोकगायन शैली ने दर्शकों को छत्तीसगढ़ की मिट्टी, गांव-गांव की परंपरा और लोकजीवन की सजीव अनुभूति कराई। जैसे ही उन्होंने कर्मा और ददरिया गीत गाए, दर्शक तालियों की गडग़ड़ाहट और नृत्य की उमंग से झूम उठे। लोकगायिका ने अपने सुरों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की संस्कृति, आस्था और जीवनशैली का अद्भुत चित्रण प्रस्तुत किया। हर प्रस्तुति ने दर्शकों को लोकसंगीत की उस दुनिया में पहुंचा दिया, जहां परंपरा और विरासत जीवंत हो उठती है। गीत के साथ दर्शक तालियों से उनका स्वागत करते रहे और पूरे कार्यक्रम स्थल में लोकसंस्कृति की गूंज छा गई। कविता वासनिक लंबे समय से छत्तीसगढ़ी लोकसंगीत की साधना कर रही हैं। उन्हें कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। उनकी प्रस्तुति ने इस वर्ष के चक्रधर समारोह में छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति की गरिमा को और ऊँचाई प्रदान की। कविता वासनिक ने मंच पर जो जादू बिखेरा, वह चक्रधर समारोह के शास्त्रीय और लोक संगीत के संगम को और अधिक समृद्ध बना दिया।वहीं संपूर्ण कार्यक्रम का सफल संचालन सुप्रसिद्ध उद्घोषक प्रो अंबिका वर्मा, राजेश डेनियल व श्रीमती रेणु गोयल ने किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

You cannot copy content of this page