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डिजिटल युग में निरंतर सीखने का महत्व

रायगढ़ – – अंग्रेजी भाषा की प्रशिक्षका सरोज कुंभकार का कहना है कि आज हर चीज़ को अपडेट करना एक ज़रूरी काम है बन गया है। बातचीत के लिए हम सबसे पहले कीपैड फोन का इस्तेमाल करते थे फिर स्मार्टफोन आया ।फिर 2G आया ,3G आया, 4G आया और 5जी आया।यह उदाहरण हमें परिवर्तन के महत्व को दिखाता है।वहीं जब एप पुराना हो जाता है तो हम उसे  अपडेट करते हैं। फोन को भी अपडेट किया जाता है। इसी तरीके से आज हमें भी बार-बार समय के हिसाब से खुद को अपडेट करने की भी जरूरत है। इसी तरह डिजिटल युग में, निरंतर सीखना व्यक्तियों और संगठनों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यह व्यक्तियों को नए कौशल हासिल करने, अपने ज्ञान को अद्यतन करने और नए अवसरों को अपनाने की अनुमति देता है।वहीं उनका कहना है कि वर्तमान परिवेश में AI एक ऐसा सिस्टम जिसने आज पूरी मानव जाती के लिए एक  क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिया है। इस डिजिटल युग में निरंतर सीखना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हम प्रासंगिक बने रहते हैं , अनुकूलनशीलता और नवीनता बढ़ती है , उन्नत कैरियर के अवसर मिलते है और सबसे महत्वपूर्ण इससे  व्यक्तिगत विकास होता है। यह कहा जाता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती  हमे  सिर्फ अपने शौक,अपनी पसंद  के क्षेत्र मे नया सीखने की कोशिश करनी चाहिए। यदि आप अच्छा खाना बना लेते है  अपने डिश मे कुछ नया करे , क्षेत्रीय भोजन सीखे और यदि क्षेत्रीय भोजन आता है तो और कुछ नए व्यंजन बनाने का प्रयास करें, इसी तरह यदि आप अच्छा गाना गाते है तो गीत लिखने का प्रयास करें, यदि गीत लिख लेते है तो लोकगीत लिखे और  यदि  लोकगीत आता है तो दूसरी भाषा मे गीत लिखे। यदि आपको भाषा पसंद है तो हर रोज नए शब्द सीखने का प्रयास करें।हर बार कुछ नया सीखने की कोशिश करेंगे अपनी  प्रतिभा को इस डिजिटल इरा मे अपडेट करने की कोशिश करेंगे।

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