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रायगढ़ के साहित्यिक आयोजन में विदेशों से प्रवासी साहित्यकारों की व्यापक सहभागिता

अमेरिका, जर्मनी, जापान सहित अन्य कई देशों की शिरकत

रायगढ़ – – विगत 30 सितम्बर को रायगढ़ अंचल की अंतर्राष्ट्रीय  ख्यातिलब्ध साहित्य मनीषी पं. मुकुटधर पांडेय की जयंती के अवसर पर रायगढ़, छत्तीसगढ़ में आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय साहित्यिक कार्यक्रम में संपूर्ण भारतवर्ष से सहभागिता के अलावा विदेशों से प्रवासी साहित्यकारों की बड़ी संख्या में भागीदारी रही जिससे कार्यक्रम की गरिमा और व्यापकता में उत्साहजनक वृद्धि हुई। अंतर्राष्ट्रीय हिंदी, छत्तीसगढ़ी, उड़िया एवं अन्य भाषा-साहित्य शोध संस्थान, रायगढ़ एवं देवम् फाउंडेशन बुल्गारिया, यूरोप के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी  छायावाद के प्रणेता कवि पद्मश्री पं.मुकुटधर पाण्डेय की जयंती के अवसर पर ऑफ़लाइन-ऑनलाइन माध्यम से स्मरणांजलि, पुस्तक चर्चा एवं अंतर्राष्ट्रीय काव्य -पाठ का वृहद आयोजन डॉ.विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग,कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार के मुख्य आतिथ्य तथा डॉ.करूणा पांडेय लखनऊ की अध्यक्षता में संपन्न हुआ ।कार्यक्रम का मंगलारंभ संस्थान कार्यालय में वेदमणि सिंह ठाकुर के निर्देशन में मनहरण  सिंह ठाकुर तथा साथियों की संयुक्त सांगीतिक प्रस्तुति से हुआ। कार्यक्रम के संयोजक एवं शोध संस्थान के संस्थापक  डॉ. मीनकेतन प्रधान, सेवानिवृत्त प्राध्यापक, पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग एवं प्रभारी प्राचार्य किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, रायगढ़ तथा पूर्व अध्यक्ष अध्ययन मंडल हिंदी, शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय, रायगढ़ छत्तीसगढ़ ने बताया कि इस कार्यक्रम में भारत के अलावा विश्व के 8 देशों से प्रवासी विद्वान साहित्यकारों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की जिनमें प्रमुख रूप से डॉक्टर मौना कौशिक अध्यक्ष देवम फ़ाउंडेशन बुल्गारिया, डॉक्टर स्नेह ठाकुर कनाडा, डॉक्टर अनीता कपूर अमेरिका,डॉक्टर रितु शर्मा नीदरलैंड, श्रीमती जय वर्मा ब्रिटेन, श्रीमती प्रतिमा सिंह सिंगापुर, डॉक्टर ऋषिकेश मिश्र जापान,डॉ.मनीष पाण्डेय नीदरलैंड तथा  डॉ.आरती पाठक दिल्ली,लिंगम चिरंजीव राव चेन्नई सहित डॉ.बेठियार सिंह साहू छपरा बिहार,सौरभ सराफ दिल्ली,डॉ.रमेश कुमार टंडन ,आर.के.पटेल,वेदमणि सिंह ठाकुर ,डॉ.वासुदेव  यादव ,बनवारी लाल देवांगन,सनत चौहान,डॉ.बी.एन.जागृत राजनांदगाँव,डॉ.इंदु सिंह हैदराबाद,मनीष पांडेय भुवनेश्वर,आकांक्षा गोपाल बिलासपुर आदि की विशेष सहभागिता रही ।अन्य प्रवासी साहित्यकार तकनीकी कारणों से नहीं जुड़ सके ।जिनकी रचनाएँ एवं सहमति प्राप्त हो गई थी ।इनको आगामी आयोजन में संपृक्त किया जायेगा। मुख्य अतिथि की आसंदी से प्रख्यात साहित्यकार डॉ विनय कुमार पाठक ने पद्मश्री मुकुटधर पांडेय के साहित्यिक अवदानों पर प्रकाश डालते हुए आयोजन की उपयोगिता, महत्व तथा छायावाद के समग्र अध्ययन में आलोच्य पुस्तक छायावाद के सौ वर्ष और मुकुट धर पाण्डेय की महत्ता का प्रतिपादन किया तथा लगभग बीस वर्षों से विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में समादृत अपनी छत्तीसगढ़ी कविता से अन्तर्राष्ट्रीय काव्य पाठ की  शुरुआत की।इस अवसर पर डॉक्टर मौना कौशिक बुल्गारिया ने अपने स्वागत अभिभाषण  में छायावाद तथा मुकुटधर पांडेय की प्रसंगिकता पर प्रकाश डाला। साथ ही उन पर केंद्रित आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया। इसी क्रम में उन्होंने डॉक्टर मीनकेतन प्रधान ,सौरभ सराफ के संपादकत्व में प्रकाशित वृहदाकार ग्रंथ “छायावाद के सौ वर्ष एवं मुकुटधर पांडेय” की सार्थकता पर भी प्रकाश डाला। कैनेडा से डॉक्टर स्नेह ठाकुर ने मानवीय संवेदनाओं से परिपूरित अपनी कविताओं का  पाठ कर सहभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अमेरिका से डॉक्टर अनीता कपूर ने पुस्तक की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला एवं अपनी कविताओं का पाठ कर विश्व पटल पर हिन्दी साहित्य की विशिष्टता का अंकन किया। ब्रिटेन से श्रीमती जय वर्मा ने वर्तमान आधुनिकतावादी परिवेश में मानवीय जीवन मूल्यों से  संदर्भित अपनी कविताओं का पाठ किया।नीदरलैंड से डॉ.ऋतु शर्मा ने प्रवासी जीवन की संवेदनाओं तथा युगीन संदर्भों को अपनी मार्मिक कविताओं से प्रतिबिंबित किया। सिंगापुर से श्रीमती प्रतिमा सिंह ने अपने ‘संदेश प्रेम का ‘ काव्य संग्रह का ज़िक्र करते हुए मानवीय मूल्यों से प्रेरित कविताओं का पाठ किया। जापान से डॉ. ऋषिकेश मिश्र ने अपनी कविता के माध्यम से  वैश्विक स्तर पर पर्यावरण -संरक्षण पर बल दिया।वहीं नीदरलैंड्स से मनीष पांडेय ने पद्मश्री मुकुटघर पांडेय के साहित्यिक व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए ग्रंथ को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया तथा कविता पाठ से हिन्दी के वैश्विक परिदृश्य को आलोकित किया।कार्यक्रम  संयोजक डॉ. मीनकेतन प्रधान ,सह संयोजक द्वय डॉ.बिठियार सिंह साहू,सौरभ सराफ ने विभिन्न देशों के   प्रवासी विद्वानों की उदार सहभागिता एवं उनके उत्साहजनक उद्बोधन तथा काव्य पाठ के लिए धन्यवाद एवं आभार ज्ञापित करते हुए भावी कार्यक्रमों में भी इसी तरह की सहभागिता के लिए अपेक्षा प्रकट की है।उल्लेखनीय है कि रायगढ़, छत्तीसगढ़ में ही नहीं अपितु राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक गरिमा के लिए ऐतिहासिक रूप से विशेष महत्व रखता है। पूर्व में भी यह धरती हिंदी के मूर्धन्य विद्वान आलोचक डॉक्टर रामकुमार वर्मा, प्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान, डॉ. विनय मोहन शर्मा, डॉ. रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’, डॉ. प्रमोद वर्मा इत्यादि राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित विद्वानों के आवागमन से गौरवान्वित होती रही है और उनकी वाणी से अनुगूंजित,  मार्गदर्शित तथा प्रेरित होती रही है। इसी दिशा के विकास के रूप में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के साहित्य मनीषियों का एक मंच पर समवेत रूप से विचार साझा करना और साहित्यिक वैभव की श्री वृद्धि करना निश्चित रूप से रायगढ़ एवं पूरे छत्तीसगढ़ अंचल के लिए गौरवपूर्ण है।आयोजन में डॉ.रमेश कुमार टंडन ने सारगर्भित समीक्षा -वक्तव्य प्रस्तुत किया।तकनीकी संयोजन एवं क्रियान्वयन में  डॉ .श्रीमती विद्या प्रधान डॉ.सुमित दुबे,अक्षय गुप्ता,अमित सदावर्ती,वाई.के.पंडा,शिव भूषण पांडेय ,प्रसन्न शर्मा,पंकज शर्मा,डॉ.एस.पी.गुप्ता,चंद्रशेखर डनसेना,जी.सी.गोचन्द्रा आदि की अहम भूमिका रही ।

   

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