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उनकी हसरत थी उतार दूँ, अपनी इस ज़िंदगी का कर्ज़

22 साल पहले दुर्घटना में मृत बेटे का कर्ज बुजुर्ग पिता ने चुकाया..

जीवन में कर्म ही मोक्ष का द्वार खोलने में मददगार होते हैं जी

रायगढ़ – – जीवन में ईमानदार होने के लिए एक चरित्रवान होने के लिए धनवान होना जरूरी हो यह आवश्यक नहीं ईमानदारी तो ईश्वरीय गुण है। जो जन्म से हर व्यक्ति के साथ होता है लेकिन अपने जीवन सफर में इसका उपयोग कितना लोग करते हैं। यह तो वक्त आने पर ही पता चलता है। ईमानदारी का कुछ यूँ ही मंजर मेरे करीब अनायास आया कि अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी एक बुजुर्ग पिता ने 22 साल पहले दुर्घटना में मृत अपने बेटे का कर्ज चुकाने जब मेरे पास आता है तो मानो गीता का ज्ञान देने वाला मेरे समक्ष आ गया हो यह आभास मुझे होने लगता है। वहीं हर पल किसी ना किसी कमी का अभाव का रोना – रोकर जीवन को कठिन समझने वाले लोग काश! उस पिता केशव अग्रवाल के उस मजबूत संकल्प को देख पाते जो उसके असहाय शरीर के अंदर मौजूद है। हे केशव! आपका ज्ञान ही नहीं, बल्कि आपका नाम भी चमत्कारिक और यथार्थ साबित हुआ है। जब 22 वर्ष पूर्व रोड एक्सीडेंट में मृत बेटे बुजुर्ग पिता कर्ज लौटने आया..जी हाँ! पिता का कर्ज बेटा उतारे ये तो आपने सुना होगा लेकिन मृत बेटे का कर्ज एक बुजुर्ग पिता ढाई दशक बाद उतारे यह अनोखी घटना मैंने अपने जीवन में पहली बार देखी। 80 वर्षीय केशव अग्रवाल जब मुझे अपने बेटे विजय का कर्ज लौटने आए तो मैं अत्यधिक भावुक हो गया। ओडिसा स्थित रंगाली बाजार से वापस आते समय कपड़ा व्यवसाई विजय अग्रवाल सहित अन्य पांच लोग ट्रक पलटने से दब कर घटनास्थल पर मर गए थे। विजय बहुत ही होनहार युवा था। कड़ी मेहनत के जरिए उसने अपना मुकाम बनाया। एक पिता के लिए जीते जी जवान होनहार बेटे की अर्थी को कंधा देने का पल कितना कठिन होगा इसे शब्दों में बयां कर पाना अत्यंत ही कठिन है…मैंने पिता केशव को ढांढस बंधाते हुए कहा आप मेरे कर्ज की चिंता ना करें बेटे का जाना दुखद है और मानवता के नाते मैंने कहा केशव भैया दुख की इस घड़ी में आपके साथ हूं…। पिता की पथराई आँखें मानो मौन होकर मुझसे कहना चाहती हो लेकिन उन्होंने इस समय कुछ नहीं कहा..। आज सुबह जब वे मेरे निवास स्थान पहुंचे तो मैंने पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया और हाल चाल पूछने पर  उन्होंने कहा अपने मृत बेटे का कर्ज लौटाने आया हूँ। उनका हौसला देख मैं स्तब्ध हो गया और 22 साल पहले हुई घटना मेरी आँखों के सामने आ गई…। और मैंने कहा, भैया मैंने कर्ज वापस लेने मना कर दिया था उन्होंने कहा बेटा मुझे बहुत से लोगों ने परेशान किया लेकिन तुमने कभी परेशान नहीं किया मेरी अंतरात्मा हमेशा कचोटती रहती थी कि जिसने मुझे परेशान नहीं किया मुझे उसका कर्ज लौटना चाहिए…। बेटा! कर्ज वापस ले लो, मुझे संतोष होगा…। उनके विनम्रता भरे आग्रह को मैं ठुकरा नहीं पाया…। लेकिन आज कलियुग में भी ऐसे लोग हैं जो अपने जवान बेटे के कर्ज को 22 साल बाद वापस कर आत्मसंतुष्टि का अनुभव करते हैं..। यही सद्कर्म है जो मनुष्य को लौट कर अवश्य मिलते हैं …। केशव भैया के साथ मैंने ये तस्वीर यह सोच कर साझा कर रहा हूँ कि इनके बेटे विजय को एक बार मैं पुनः श्रद्धांजलि अर्पित कर सकूँ और इस पिता के हौसले को नमन् करुँ।साथ ही हर जन्म में मुझे, आपके जैसे लोगों का सानिध्य मिले केशव भैया …। और यह सदा मेरे अंतस में गूँज रही है कि-उ

उनकी हसरत थी उतार दूँ, अपनी इस ज़िंदगी का कर्ज़

मेरे दिल से उठ रही सदा, मैंने निभाया अपना फर्ज़

आपको भूल पाना मुश्किल है,उतर गए हैं मेरे दिल में

मिलेंगे कोई विरले यहाँ, केशव भैया सा मुश्किल में।।                                गणेश अग्रवाल, रायगढ़।                             

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