चिरंजीव राव की कृति का विमोचन और डॉ. मौना कौशिक का हुआ आत्मीय सम्मान

प्रवासी भारतीय हिंदी भाषा व संस्कृति के ध्वज वाहक हैं- न्यायमूर्ति चंद्रभूषण वाजपेई विश्व हिन्दी अधिष्ठान की गौरवशाली उपलब्धि- डॉ.मीनकेतन प्रधान रायगढ़ – – डॉ. मीनकेतन प्रधान पूर्व प्राध्यापक किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़, संस्थापक विश्व हिन्दी अधिष्ठान द्वारा प्रकाशित आंध्रप्रदेश के साहित्यकार चिरंजीव राव की सद्यः प्रकाशित काव्य कृति ‘ बाग – जलियाँवाला ‘ का विमोचन तथा वरिष्ठ प्रवासी हिन्दी साहित्यकार डॉ. डॉ. मौना कौशिक -सोफिया यूनिवर्सिटी बल्गारिया का सम्मान बिलासपुर के प्रयास प्रकाशन -संस्कार भवन में दिनांक 25 फरवरी को मुख्य अतिथि -न्यायमूर्ति डॉ. चंद्रभूषण वाजपेयी के मुख्य आतिथ्य , डॉ. श्यामलाल निराला -प्राचार्य जे.पी. वर्मा शासकीय महाविद्यालय बिलासपुर , हिन्दी छत्तीसगढ़ी कथाकार डॉ. विनोद कुमार वर्मा के विशिष्ट आतिथ्य तथा डॉ. मीनकेतन प्रधान की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ।प्रथम चरण के कार्यक्रम का आरंभ डॉ. विद्या प्रधान , पंकज शर्मा – संयोजक विश्व हिंदी अधिष्ठान-रायगढ़, डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह-महासचिव भाषा सहोदरी हिंदी समिति-दिल्ली, देवम् फाउंडेशन सोफिया-बुल्गारिया, डॉ. राघवेंद्र दुबे – अध्यक्ष प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी एवं अंजनी तिवारी सुधाकर -अध्यक्ष राष्ट्रीय कवि संगम-बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान अतिथियों द्वारा सरस्वती प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा रामनिहोरा राजपूत की सरस्वती वंदना से हुआ।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति डॉ.चंद्रभूषण वाजपेई , पूर्व कुलपति – हिदायतुल्ला नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी रायपुर ने अपने उद्बोधन में डॉ. मौना कौशिक के प्रदेय की सराहना करते हुए उनके कार्यों को वैश्विक स्तर पर हिन्दी भाषा,साहित्य और सांस्कृतिक विकास की दिशा में महत्त्वपूर्ण बताया । उन्होंने आज के संदर्भ में हिंदी भाषा की वैश्विक पहचान बनाने में प्रवासी भारतीयों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए साहित्य के माध्यम से अपने इतिहास के महत्त्व पूर्ण पन्नों को देश के युवा नागरिकों के समक्ष रखना राष्ट्रीय कर्तव्य बताया। इसी तारतम्य में न्यायमूर्ति वाजपेयी ने ‘बाग जलियांवाला ‘ के काव्य कृतिकार चिरंजीव राव की रचनात्मकता को भारतीय स्वाधीनता संघर्ष की कारुणिक गाथा बताते हुए राष्ट्र प्रेम की भावना को विकसित करने का महती उद्देश्य निरूपित किया ।कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. श्याम लाल निराला- प्राचार्य जे पी वर्मा महाविद्यालय बिलासपुर ने आंध्रप्रदेश के रचनाकार चिरंजीव राव की रचना को राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत कहा तथा डॉ. मौना कौशिक के साहित्यिक योगदान को हिन्दी के विकास-विस्तार में सफल प्रयास बताया। डॉ. निराला ने इस आयोजन को बिलासपुर साहित्यधानी में निरंतर चलने वाले साहित्यिक अनुष्ठानों की महत्त्वपूर्ण कड़ी बताया ।विशिष्ट अतिथि डॉ . विनोद कुमार वर्मा -लाला जगदलपुरी सम्मान से सम्मानित साहित्यकार ने पुस्तक विमोचन और सम्मान उपक्रम को सार्थक बताते हुए संदर्भगत नारी शक्ति की प्रेरक सत्य कथा पर आधारित अपनी बहुप्रशंसित कहानी ‘मछुआरे की लड़की ‘ की अन्तर्वेदना को उजागर किया। उन्होने डॉ.मौना कौशिक के हिदी साहित्य के वैश्विक उन्नयन में दिए जा रहे योगदान की सराहना की । जिस पर कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. मीनकेतन प्रधान ने विदेशी भाषाओं में भी ‘ मछुआरे की लड़की ‘ कहानी के अनुवाद को उपादेय कहा।इस अवसर पर उन्होंने अपने वक्तव्य में डॉ .मौना कौशिक द्वारा सोफिया विश्वविद्यालय बुल्गारिया में बल्गारियन साहित्य को हिंदी व हिंदी को बल्गारियन भाषा में अनुवाद के माध्यम से स्थापित किये जा रहे प्रयासों को हिन्दी की वैश्विक प्रतिष्ठा के लिए सार्थक बताया।उन्होंने अधिष्ठान द्वारा प्रकाशित चिरंजीव राव की कृति को प्रेरक सिद्ध किया। विश्व हिंदी अधिष्ठान रायगढ़ के वैश्विक समन्वयन में योगदान को प्रस्तुत करते हुए प्रयास प्रकाशन साहित्य अकादमी के संरक्षक डॉ .विनय कुमार पाठक के मार्गदर्शन, प्रोत्साहन के प्रति कृतज्ञता प्रकट किया। इस गरिमामय आयोजन में बुल्गारिया से आकर कार्यक्रम में सहभागी प्रवासी हिंदी भाषा विदुषी डॉ.मौना कौशिक ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिंदी साहित्य व बल्गारियन कला -साहित्य के मध्य समन्वयन के साथ इसे अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर स्थापित करने की दिशा में वे क्रियाशील हैं । बल्गारियन छात्र हिंदी भाषा में स्नातक व परास्नातक कर रहे हैं। डॉ. कौशिक ने गोस्वामी तुलसीदास रचित हनुमान चालीसा का बल्गारियन व अंग्रेजी में लिप्यंतरण कर भारतीय साहित्य-संस्कृति को सर्वोच्च ऊँचाई दी है ।बल्गारिया के लोगों में इसे लोकप्रिय बनाने तथा इसकी आध्यात्मिक शक्ति के प्रति जागरूकता लाने का कार्य देवम् फाउंडेशन के माध्यम से किया जा रहा है।उन्होंने ‘बाग जलियांवाला ‘ काव्य कृति के विमोचन में सहभागिता के लिए हर्ष प्रकट करते हुए चिंरजीव राव को श्रेष्ठ साहित्यकार कहा।इस क्रम में कृतिकार चिरंजीव राव ने अपनी काव्य कृति ‘जलियाँवाला बाग ‘ की रचना को उस नृशंस हत्याकांड में मारे गए निर्दोष स्वतंत्रता आंदोलन के सत्याग्रहियों के प्रति श्रद्धांजलि बताया। इस गौरवशाली अवसर पर विश्व हिन्दी अधिष्ठान द्वारा प्रवासी भारतीय साहित्यकार डॉ .मौना कौशिक को हिंदी भाषा के वैश्विक विस्तार में योगदान के लिए तथा चिरंजीव राव को उत्कृष्ट साहित्य सेवा के लिए छत्तीसगढ़ के साहित्य पुरोधा व छायावाद के जनक पद्मश्री मुकुट धर पाण्डेय की स्मृति में सम्मान पत्र दे कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ .राघवेन्द्र दुबे ने किया। स्वागत संबोधन अंजनी कुमार तिवारी ‘सुधाकर’ द्वारा व आभार प्रदर्शन डॉ.श्रीमती विद्या प्रधान द्वारा किया गया। वहीं कार्यक्रम के दूसरे चरण में समसामयिक काव्यगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें कवियों ने अपनी काव्य रसासिक्त रचनाओं से श्रोता वर्ग को मंत्र मुग्ध कर दिया। रचनापाठ करने वाले रचनाकार -अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर, डॉ . विवेक तिवारी,डॉ.शत्रुघ्न जेसवानी,राजेश कुमार सोनार, शीतल प्रसाद पाटनवार, राम निहोरा राजपूत, बालमुकुंद श्रीवास,श्रीमती कामना पाण्डेय,श्रीमती सुषमा पाठक,श्रीमती मीना दुबे,महेन्द्र दुबे,दीपक दुबे,पंकज शर्मा,डॉ.मौना कौशिक, डॉ.मीनकेतन प्रधान, चिरंजीव राव , डॉ .विनोद कुमार वर्मा,डॉ राघवेन्द्र कुमार दुबे।इस आयोजन की व्यापक सफलता के लिए प्रो. आर. के. पटेल, डॉ बेठियार सिंह साहू,डॉ. राजेश दुबे, डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह, अमित सदावर्ती, वसंत पंडा, डॉ. सीमा प्रधान, बनवारी लाल देवांगन, हरिशंकर गौराहा, सौरभ सराफ, डॉ. करुणा पांडे,,मनीष पांडेय, युगल किशोर पंडा, लोचन गुप्ता , डॉ. एस . पी. गुप्ता तथा अन्य साहित्यकारों ने बधाई दी है ।



