जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन के बीएड छात्रों ने किया छत्तीसगढ़ का शिमला मैनपाट का शैक्षणिक भ्रमण

प्रकृति के खूबसूरत नजारों को बेहद करीब से देखा किया शांति सुकून का एहसास
रायगढ़ – – शहीद नंदकुमार पटेल विश्वविद्यालय रायगढ़ से संबद्ध जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन धनुहारडेरा रायगढ़ बीएड प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के नियमित प्रशिक्षणार्थी छात्र छात्राओं ने विगत 16 एवं 17 जनवरी 2026 को चेयरमैन शिरीष सारडा व डायरेक्टर श्रीमती तृप्ति अग्रवाल के ऊर्जामय संरक्षण में तथा प्राचार्य डॉ गजेंद्र चक्रधारी के मार्गदर्शन में तथा प्रो विवेक कांबले, डॉ सूर्यदेव यादव, नरेंद्र प्रधान प्रो केशव पटेल, शांति महंत, प्रो नेहा डनसेना के कुशल नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का शिमला के नाम से सुविख्यात पर्यटन स्थल मैनपाट का शैक्षणिक भ्रमण किया।वहीं इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए प्रिंसिपल डॉ गजेंद्र चक्रधारी ने बताया कि मैनपाट जिला मुख्यालय अंबिकापुर से 55 किलोमीटर दूरी पर तथा सीतापुर से लगभग 35 किलोमीटर..की दूरी पर समुद्र तल से 3781 फीट पर प्रकृति की सुरम्य वादियों में विंध्य पर्वत माला पर अवस्थित है। इसे छोटा तिब्बत भी कहा जाता है। जानकी कॉलेज ऑफ एजुकेशन धनुहारडेरा रायगढ़ के चेयरमैन शिरीष सारडा ,डायरेक्टर श्रीमती तृप्ति अग्रवाल तथा शांति महंत एवं बीएड स्टॉफ तथा बीएड के छात्र छात्राओं ने मैनपाट में पर्यटन विभाग के शैला रिसोर्ट पर रुककर दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण दौरान छात्रों ने मैनपाट के प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण निम्न बेहद खूबसूरत दर्शनीय स्थलों का अवलोकन कर अपने ज्ञान में अभिवृद्धि किया ।

टाइगर प्वाइंट – – छत्तीसगढ़ में कई पर्यटन स्थल हैं जहां की खूबसूरती देखते ही दिल को छू जाती है. इन्ही में से एक है टाइगर पॉइंट. इस झरने की खासियत है, कि धरती पर गिरते समय इसकी आवाज टाइगर की दहाड़ जैसी सुनाई देती है. यह मैनपाट के बहुत ही खूबसूरत जगहों में शामिल है। मेहता पॉइंट पैराग्लाइडिंग का आनंद लेने के लिए एक बेहतरीन जगह है यह मैनपाट से 8 किमी की दूरी पर स्थित यह स्थान है जहाँ आप प्राकृतिक अछूती सुंदरता और हरियाली को देखते हुए पैराग्लाइडिंग के रोमांच का आनंद ले सकते हैं। जलपरी पॉइंट यहाँ आने के बाद आप इस झरने को देख कर मोहित हो जायेंगे यह मैनपाट का सबसे खूबसूरत झरना है, यहाँ के स्थानीय लोगों में किवदंती प्रचलित है कि यहाँ पर पहले जलपरी दिखाई देती थी बस यही कारण है की यहाँ का नाम जलपरी रखा गया है। मैनपाट का “दलदली” एक अद्वितीय और रहस्यमयी स्थान है, जो अपने दलदली भू-गठन के लिए प्रसिद्ध है। यह क्षेत्र पूरी तरह से दलदली है, जहां जमीन पर चलने या कूदने से नीचे की सतह में हल्का कंपन महसूस होता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो जमीन हिल रही हो।स्थानीय भाषा में “दलदली ” का अर्थ ही होता है हिलती हुई ज़मीन। यह स्थल भूगर्भीय दृष्टिकोण से भी बेहद खास है।वहीं मैनपाट का ‘उल्टा पानी’ एक अनोखी जगह है जहाँ पानी ढलान के बजाय चढ़ान की ओर बहता हुआ दिखता है, और न्यूट्रल में खड़ी गाड़ियाँ भी ऊपर की ओर लुढ़कती हैं । इसे चुंबकीय क्षेत्र के कारण गुरुत्वाकर्षण के विपरीत एक प्राकृतिक चमत्कार माना जाता है, जो एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है।
तिब्बती बौद्ध मंदिर यहां के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में से एक – – तिब्बत से निर्वासन के बाद कई तिब्बती शरणार्थी सन् 1962- 63 में मैनपाट में आकर बस गए थे और उन्होंने यहां अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को जीवित रखा। इसी विरासत का प्रतीक है यह सुंदर बौद्ध मंदिर, जिसे रंग-बिरंगे झंडों, शांत वातावरण और तिब्बती स्थापत्य शैली की कलाकृतियों से सजाया गया है।परपटीया सनसेट पॉइंटसूर्यास्त के अविस्मरणीय नज़ारों के लिए प्रसिद्ध, जहाँ पहाड़ क्यूब्स जैसे दिखते हैं।सरभंजा जलप्रपात मैनपाट के प्रमुख झरनों में से एक.है मांड नदी इस जलप्रपात की निर्माण करती है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ के दो प्रमुख नदियों रिंहद और मांड का उद्गम स्थल भी है मैनपाट।
बायो डायवर्सिटी पार्क – – मैनपाट बायो डायवर्सिटी पार्क छत्तीसगढ़ के मैनपाट क्षेत्र में स्थापित एक हरा-भरा और प्राकृतिक स्थल है, जिसका उद्देश्य स्थानीय औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों की विविध प्रजातियों का संरक्षण करना है, जो पर्यटकों को प्रकृति और जैव विविधता का अनुभव करने का एक शांत और शैक्षिक अवसर प्रदान करता है। यह एक “ग्रीन लैबोरेटरी” के रूप में कार्य करता है, यहां आगंतुक पौधों की वैज्ञानिक और स्थानीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, और यह प्राकृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थान है।वस्तुता मैनपाट का दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण मैनपाट की ठंडकता से सफलता पूर्वक संपन्न हुआ। .



