रायगढ़ - - गेहूँ उत्पादन तकनीक पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण विगत 7 जनवरी को ग्राम चिखलरौंदा, विकासखंड जैजैपुर, जिला सक्ती में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अनुसूचित जनजाति उपयोजना के अंतर्गत अखिल भारतीय गेहूँ एवं जौ अनुसंधान परियोजना, क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बिलासपुर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में क्षेत्र के 50 से 55 कृषकों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनहरण लाल बर्मन, सरपंच ग्राम चिखलरौंदा थे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. दिनेश पांडेय, प्रमुख अन्वेषक एवं कृषि वैज्ञानिक (एग्रोनॉमिस्ट) द्वारा की गई।प्रशिक्षण के दौरान डॉ. पांडेय ने क्षेत्र में प्रदर्शित की गई उन्नत गेहूँ किस्मों DBW-377, मावंत (CG-40) एवं कनिष्का (CG-1029) के प्रमुख गुणों, उत्पादन क्षमता एवं अनुकूलता के बारे में विस्तार से जानकारी दी। साथ ही कृषकों को समय पर गेहूँ की बुवाई करने हेतु प्रेरित किया गया तथा देर से बुवाई करने पर होने वाले उपज में कमी एवं उसके दुष्प्रभावों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। परियोजना में कार्यरत सुश्री माधुरी ग्रेस मिन्ज ने गेहूँ की विभिन्न परिस्थितियों में बुवाई हेतु उपयुक्त किस्मों के चयन के बारे में विस्तृत जानकारी कृषकों को दी गई। इसी कड़ी में डॉ. अंजुम अहमद, तकनीकी सहायक (एग्रोनॉमी) ने गेहूँ फसल में सिंचाई प्रबंधन एवं खरपतवार प्रबंधन (वीड मैनेजमेंट) पर वैज्ञानिक एवं व्यवहारिक जानकारी कृषकों को प्रदान की गई। कार्यक्रम का संचालन एन. आर. कोसले, सहायक विकास अधिकारी (ADO), कृषि विभाग ने किया ।








