डॉ मीनकेतन प्रधान ने प्रयागराज के साहित्यकारों से किए साहित्यिक विमर्श  

रायगढ़ - - प्रयागराज से आये प्रतिष्ठित साहित्यकार रंजन पाण्डेय, डॉ.आदित्य नारायण सिंह (संचालक लोक रंजन प्रकाशन),इं. जी.सी. शर्मा ने  अपनी  साहित्यिक यात्रा के दौरान विश्व हिन्दी अधिष्ठान कार्यालय रायगढ़ में मीनकेतन प्रधान से भेंटकर वर्तमान हिन्दी साहित्य की दशा-दिशा एवं सृजन के विविध आयामों पर सार्थक विमर्श किया ।

साहित्यकार विवेक रंजन ने हिन्दी की साहित्यिक-सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक वैश्विक परिप्रेक्ष्य में आगे बढ़ाने की संकल्पना के साथ नयी पीढ़ी को वर्तमान युग परिदृश्य में सार्थक सृजन की दिशा में प्रेरित करने की आवश्यकता पर बल दिया ।उन्होंने छायावादी कवि जयशंकर प्रसाद,सूर्यकांत त्रिपाठी निराला,सुमित्रानंदन पंत ,महादेवी वर्मा  सहित कई आलोचकों की  सुदीर्घ परम्परा का ज़िक्र करते हुए आज के समय में नवाचार और युगीन संदर्भों पर अपने विचार रखे ।उन्होंने  प्रसिद्ध कवि मुकुटधर पाण्डेय को छायावाद के प्रवर्तक के रूप में स्मरण कर हिन्दी साहित्य जगत में रायगढ़ के  महत्त्व का रेखांकन किया । इस  कड़ी में डॉ.आदित्य नारायणन सिंह ने हिन्दी के प्रख्यात एकांकीकार डॉ.रामकुमार वर्मा की साहित्य साधना और सानिध्य पर विस्तृत वार्ता की । तत्कालीन साहित्यकारों से उनके सरोकारों और प्रदेय का भी उन्होंने उल्लेख किया ।

उन्होंने नये रचनाकारों के सृजन की संभावनाओं  और उनके प्रकाशन को महत्वपूर्ण बताया है । इनके साथ ही प्रयागराज के वास्तुविद इं.जी.सी. शर्मा ने साहित्य और भारतीय संस्कृति की  महानतम परम्पराओं के ऐतिहासिक महत्व को आज के संदर्भ में विश्लेषित किया। इस अवसर पर अधिष्ठान के मीनकेतन प्रधान ने अपने साहित्यिक उपक्रम ,अन्तर्राष्ट्रीय आयोजन के साथ ही शोध के क्षेत्र में किये जा रहे प्रयासों की चर्चा की । जिसे प्रयागराज से आये उक्त साहित्यकारों ने हिन्दी भाषा और साहित्य के वैश्विक विकास का सार्थक कार्य निरुपित किया तथा अधिष्ठान की गतिविधियों में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया ।इस अवसर पर वैश्विक स्तर पर शोध परक कार्यों के लिए प्रतिष्ठित- “विश्व हिन्दी अधिष्ठान ( न्यास ) को रंजन पांडेय ने अपनी पुस्तक ‘ कोटा फीवर’,’श्मशान कन्या ‘तथा डॉ.आदित्य नारायण सिंह ने युवा रचनाकार हर्षित कुमार ‘ जितेंद्र ‘ द्वारा लिखित ‘ क़िस्से इलाहाबाद के ’ कहानी संग्रह की प्रति भेंट की  । इन पुस्तकों से हिन्दी साहित्य की आधुनिक दिशाओं का संकेत मिलता है । इसके साथ ही चर्चित युवा साहित्यकार दिनेश माली तालचेर ओडिशा के साहित्यिक प्रदेय पर सार्थक विमर्श हुआ ।तत्पश्चात अधिष्ठान द्वारा प्रकाशित पुस्तकों और अन्तर्राष्ट्रीय गतिविधियों  के भावी स्वरूप के निर्धारण में प्रयागराज के उक्त रचनाकारों ने अपनी सक्रिय सहभागिता की बात कही ।अधिष्ठान के न्यासी श्रीमती डॉ.विद्या प्रधान ने आभार  प्रकट किया ।

SK
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