हिंदीतर भाषी हिंदी नव लेखक शिविर सम्बलपुर में आयोजित

रायगढ़ से मीनकेतन प्रधान मार्गदर्शक नामित पूर्व कुलपति प्रो. दीपक कुमार बेहरा और कुलपति प्रो. व्योमकेश त्रिपाठी ने किया शुभारंभ

रायगढ़ - - केंद्रीय हिंदी निदेशालय, शिक्षा मंत्रालय उच्चतर शिक्षा विभाग,भारत सरकार ,नई दिल्ली द्वारा विगत 25 से 30 अप्रैल, 2026 तक गंगाधर मेहेर विश्वविद्यालय, सम्बलपुर(ओडिशा ) में संयोजित छह दिवसीय हिंदीतर भाषी हिंदी नवलेखक शिविर के लिए डॉ. मीनकेतन प्रधान , पूर्व प्राध्यापक हिन्दी किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ , संस्थापक- विश्व हिन्दी अधिष्ठान ( न्यास )को मार्गदर्शक नामित किया गया है। विगत 26अप्रेल को उक्त राष्ट्रीय स्तर के शिविर का गरिमामय उद्घाटन विश्वविद्यालय के सभागार में पूर्व कुलपति डॉ. दीपक कुमार बेहरा के मुख्य आतिथ्य , वर्तमान पदस्थ कुलपति डॉ व्योमकेश त्रिपाठी की अध्यक्षता , शिविर प्रभारी डॉ. बबीता रानी श्रीवास्तव  सहायक निदेशक के मार्गदर्शन में समन्वयक डॉ . रंजन सेठी ,संयोजक डॉ. दाशरथी बेहरा तथा सह संयोजक डॉ. प्रणति बेहरा के डॉ. स्मृति स्मरणिका जेना के क्रियान्वयन से भव्य रूप में हुआ।

आरंभ में शिविर प्रभारी डॉ. बबीता श्रीवास्तव सहायक निदेशक, नई दिल्ली द्वारा  हिंदीतर भाषी हिंदी नवलेखकों  की प्रतिभा के प्रोत्साहन ,विविध विधाओं में सृजनात्मक लेखन, अनुबाद ,पत्रकारिता आदि की सूक्ष्म जानकारी देने तथा हिंदी साहित्य की मुख्य धारा से उनके जोड़ने के  महत् उद्देश्य पर विस्तृत प्रकाश डाला गया। मुख्य अतिथि की आसंदी से पूर्व कुलपति डॉ. दीपक बेहरा ने इस शिविर में राष्ट्रीय चेतना की भावना को भाषायी एकसूत्रता के माध्यम से विकसित करने के उपक्रम को अत्यंत कारगर बताया ।उन्होंने  आज की तकनीकी सुविधाओं के उपयोग के साथ ही पुस्तकों के अध्ययन-मनन तथा स्वयं के लेखन सृजन से अपने ज्ञान को समृद्ध करने  पर ज़ोर डाला। कार्यक्रम की अध्यता कर रहे  कुलपति प्रोफेसर व्योमकेश त्रिपाठी ने  अपने उद्बोधन में कहा कि आज के वैज्ञानिक युग में  राष्ट्रीय परंपराओं और सांस्कृतिक ज्ञान को बढ़ाने के साथ ही अन्य क्षेत्रीय मातृभाषाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर विश्व में भारत को गौरवान्वित करने के लिए हिंदी को बढ़ावा देना आवश्यक माना।उन्होंने  यह भी कहा कि भारत  के दूर - सूदूर अंचल में रह रहे आमजन  को जोड़ने और सामाजिक सद्भावना को विकसित करने से हमारा देश मजबूत और समृद्ध होगा।हिंदी वैश्विक स्तर पर तेज़ी से फैल रही है इसलिए राष्ट्र भाषा के रूप में इसका महत्त्व है । जिसे लिखने - बोलने में भी उपयोग किया जाना चाहिए क्योंकि अहिन्दी क्षेत्र में भी  हिन्दी को सभी समझते हैं जो विचारों के आदान प्रदान का माध्यम है।हिन्दी के विकास से राष्ट्रीय एकता को बल मिलेगा। इस अवसर पर मुख्य वक्ता ओएसओयू के पूर्व कुलसचिव ओड़िया- हिन्दी साहित्यकार डॉ. जयंत कर शर्मा ने हिंदी भाषा -साहित्य के समग्र विकास को वर्तमान वैश्वीकरण के युग में आवश्यक बताते हुए हिन्दी में साहित्य सृजन के लिए शिविरार्थियों को प्रेरित किया । तमिलनाडु केन्द्रीय वि.वि. तिरुवर से  आये प्रो. नारायण राजू ने भी हिंदी में लिखने और बोलने  का आह्वान किया। आयोजन में किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़ के पूर्व प्रोफेसर साहित्यकार डॉ. मीनकेतन प्रधान द्वारा अपनी काव्य -कृतियों  को पूर्व कुलपति प्रो. दीपक कुमार बेहरा एवं वर्तमान कुलपति प्रो. व्योमकेश त्रिपाठी के हाथों हिन्दी विभाग गंगाधर मेहेर विश्वविद्यालय संबलपुर को हिन्दी - ओड़िया साहित्य के अन्तर्संबंघो को विकसित करने के उद्देश्य से भेंट की गई । इसके लिए कुलपति द्वय ने उत्कृष्ट साहित्य सृजन के लिए उन्हें बधाई देते हुए । समन्वयक डॉ. रंजन सेठी के क्रियान्वयन , डॉ. दाशरथी बेहरा से संचालन एवं हिन्दी विभाग में कार्यरत डॉ. प्रणति बेहरा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उद्घाटन सत्र के बाद द्वितीय सत्र में डॉ. प्रीति त्रिपाठी - सहायक प्राध्यापक हिन्दी  बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय काशी ने ‘ साहित्य क्या है और उद्देश्य’ विषय पर साहित्य की प्राचीन परंपरा से से लेकर  आधुनिक युगीन विकास को लक्षित करते हुए मानव जीवन की अन्तश्तेचना के परिशोधन ओर पुनर्निर्माण की प्रकिया को निरूपित किया । उन्होंने साहित्य को मानवीय मूल्यों का संवाहक बताया । इस क्रम में डॉ.मीनकेतन प्रधान ने ‘  कविता की सृजन यात्रा ‘ विषय पर कविता सृजन में संवेदना और अनुभूति पक्ष पर सोदाहरण वक्तव्य देते हुए मौलिक रूप से सृजन के विविध पहलुओं से शिविरार्थियों का मार्गदर्शन किया । उन्होंने कविता की रचना प्रक्रिया तथा सामाजिक प्रभाव पर सारगर्भित विचार रखे । आयोजन में विश्वविद्यालय के अधिकारियों सहित ओड़िआ, संस्कृत विभाग के अध्यापक, अध्यापिका, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं की व्यापक भागीदारी रही ।आगे के दिवसों में  डॉ.जयंत कर शर्मा, पूर्व विभागाध्यक्ष तथा ओएसओयू, संबलपुर के पूर्व कुल सचिव , डॉ.बासुदेव सुनानी, महिला महाविद्यालय, झारसुगुड़ा की सहायक प्रोफेसर डॉ.मीना सोनी, गंगाधर मेहेर विश्वविद्यालय के डॉ. दाशरथी बेहेरा, शासकीय महिला महाविद्यालय, बलांगीर के अध्यापक प्रभंजन मिश्र आदि कार्यालयी में समादृत हैं ।शिविर में ओड़िशा, महाराष्ट्र आदि हिंदीतर भाषी राज्यों से नव लेखक शामिल हैं। उक्त आयोजन के लिए डॉ. करुणा पांडे , डॉ. विनय कुमार पाठक , सूर्यकांत शर्मा, डॉ. दीपक पांडेय, चिरंजीव राव, डॉ . अनिल सक्सेना,डॉ. विनोद वर्मा, दिनेश कुमार माली ,डॉ. बेठियार सिंह साहू, पंकज शर्मा, डॉ. वीणा विज उदित , डॉ. राजेश दुबे ,डॉ. रमेशचन्द्र श्रीवास्तव, वसंत पंडा, डॉ. मौना कौशिक , डॉ. ज्ञानेश्वरी सिंह , सौरभ सराफ,सोनल श्रीवास , अमित सदावर्ती . मनीष पांडेय, हारा पटेल, अंजनी सुधाकर , युगल किशोर पंडा, डॉ. सौदागर गुप्ता, जगदीश यादव , हरिशंकर गौरहा , लोचन गुप्ता , डॉ. रोशनी मिश्रा। आदि ने बधाई दी है।

SK
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