लिंगम चिरंजीव राव एवं वरिष्ठ साहित्यकार डा. मीनकेतन प्रधान को काव्य वाटिका सम्मान

रायगढ़ – – ख्यातिलब्ध वरिष्ठ साहित्यकार और विश्व हिन्दी अधिष्ठान रायगढ़ छत्तीसगढ़ के सक्रिय सदस्य लिंगम चिरंजीव राव एवं रायगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार डा. मीनकेतन प्रधान का सम्मान काव्य वाटिका रायगढ़ की 43 एवं 44 वीं श्रृंखला में संस्था द्वारा गौरव गरिमा के साथ अधिष्ठान कार्यालय में डॉ.आशा मेहर किरण ,डॉ.सुधा देवांगन ‘सुचि’ संस्थापक के मार्गदर्शन में शाल -श्रीफल और गमले में हरित पौधा भेंट कर किया गया।इस सम्मान के अवसर पर काव्य वाटिका के संस्थापक सदस्य मनोज श्रीवास्तव श्री अरविंद सोनी सार्थक,स्वाति पंड्या सहित शहर के साहित्यकार विश्व हिन्दी अधिष्ठान के संस्थापक डॉ.मीनकेतन प्रधान,डॉ.श्रीमती विद्या प्रधान,पंकज रथ शर्मा, श्रीमती रश्मि वर्मा,सोनल मावतवाल श्रीवास आदि की गरिमामयी उपस्थिति थी।

इस अवसर पर लिंगम चिरंजीव राव के व्यक्तित्व-कृतित्व को उजागर करते हुए डॉ.आशा मेहर ने कहा कि वे छत्तीसगढ़-ओडिशा आदि विभिन्न प्रदेशों में अपने सेवाकाल के दौरान हिन्दी भाषा साहित्य के उन्नयन में योगदान करने वाले प्रमुख साहित्यकार हैं तथा वर्तमान में आंध्रप्रदेश में रहते हुए पूरे देश के विभिन्न महत्वपूर्ण आयोजनों में सहभागी होते रहते हैं । उन्होंने चिरंजीव राव द्वारा लिखित रचनाओं में राष्ट्रीय मानवीय चेतना की अभिव्यक्ति और सामाजिक समस्याओं सहित नारी अस्मिता को स्थापित करने का उल्लेख किया । डॉ. सुधा देवांगन ने भी साहित्यकार चिरंजीव के सम्बंध में बताया कि उनका साहित्यिक दृष्टिकोण व्यापक है तथा वे अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं । चिरंजीव राव ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में यह विचार व्यक्त किया कि आज के युग समय में साहित्य के माध्यम से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परम्पराओं सहित पर्यावरण संरक्षण की नितांत आवश्यकता है।उन्होंने इस सम्मान के लिए काव्य वाटिका के सदस्यों के प्रति आभार प्रकट कर साहित्य सेवा के लिए समर्पित रहने को प्रेरक बताया। उक्त आयोजन के बाद विश्व हिन्दी अधिष्ठान रायगढ़ द्वारा भी चिरंजीव राव का सम्मान अधिष्ठान की ओर से डॉ. श्रीमती विद्या प्रधान और पंकज रथ शर्मा द्वारा किया गया ।पूरे आयोजन में देश के प्रतिष्ठित साहित्यकार अधिष्ठान के संस्थापक डॉ.मीनकेतन प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति थी।उन्होंने चिरंजीव राव को बधाई देते हुए उनकी साहित्यिक प्रतिष्ठा की कामना की । डॉ.प्रधान ने काव्य वाटिका के सदस्यों की सराहना करते हुए सतत साहित्य सेवा की प्रेरणा दी।


