कला - साहित्य

झूमती वसुधा

नदी यमुना सुहाती है,

बहे जब धार कल-कल है।

मुरलिया गूँज जाती तब,

सुनाती गीत पल-पल है।

हवाएँ भी सुवासित हैं,

अहो! ‘सुषमा’ सजी गलियाँ-

खुशी से झूमती वसुधा, लहर नित देख छल-छल है।।

बरसतीं प्रेम की बूँदें, रचे जब रास मधुवन में।

चली मदमस्त पुरवाई, बहे रसधार जीवन में।

खिली सारी दिशाएँ हैं, निभाती प्रीति कान्हा से-

घड़ी शुभ आज मिलने की, खिले हैं फूल उपवन में।।~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल🖋️(रायगढ़/रायपुर छ.ग.)

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