छत्तीसगढ़ की हाइकु कवयित्री सुजाता दाश के 100 हाइकु भी संकलित
रायगढ़ – – जापान की काव्य परंपरा से विकसित हाइकु आज विश्व साहित्य में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। मात्र 5-7-5 के विन्यास में 17 वर्णों की संक्षिप्त काव्य रचना हाइकु कम शब्दों में गहन अनुभूति, प्रकृति-बोध और जीवन-दर्शन को अभिव्यक्त करने की अद्भुत क्षमता रखती है। इसी समृद्ध साहित्यिक परंपरा को व्यापक स्वरूप प्रदान करने वाली महत्वपूर्ण कृति ‘हाइकु शतदल’ का प्रकाशन साहित्य जगत की उल्लेखनीय उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक’ के संपादन में उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ से प्रकाशित ‘हाइकु शतदल’ में तीन देशों तथा भारत के 14 प्रदेशों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 54 जिलों के 102 हाइकुकारों के 10 हजार से अधिक हाइकु संकलित किए गए हैं। विभिन्न आयु वर्ग के रचनाकारों की रचनाओं से सुसज्जित इस संग्रह में 85 वर्ष के दो वरिष्ठ साहित्यकारों की रचनाएँ भी शामिल हैं , जो इसकी व्यापकता और साहित्यिक विविधता को रेखांकित करती हैं।
इस महत्वपूर्ण संकलन में छत्तीसगढ़ निवासी हाइकु कवयित्री एवं हिंदी शोधार्थी सुजाता दाश के विभिन्न विषयों पर रचित 100 उत्कृष्ट हाइकु भी शामिल किए गए हैं। सुजाता दाश की हाइकु रचनाएँ प्रकृति, जीवन, संवेदना और समकालीन अनुभवों को संक्षिप्त किंतु प्रभावशाली काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करती हैं।
‘हाइकु शतदल’ की विशेषता इसकी संक्षिप्त रचना-शैली में निहित भावों की विराटता है। यह संग्रह न केवल हाइकु की विविध रचनात्मक संभावनाओं को सामने लाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थायी साहित्यिक धरोहर के रूप में भी अपनी उपयोगिता सिद्ध करता है।
हाइकु के अध्येताओं, शोधार्थियों और साहित्य-प्रेमियों के लिए यह कृति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ‘हाइकु शतदल’ वास्तव में हाइकु साहित्य के शतदल कमल की भाँति विविध भावों, संवेदनाओं और रचनात्मक प्रतिभाओं को एक ही मंच पर समेटने वाला उल्लेखनीय साहित्यिक संकलन है।
पारिवारिक आत्मीयता से जुड़ा यह साहित्यिक क्षण भी विशेष उल्लेखनीय है कि ‘हाइकु शतदल’ के संपादक एवं साहित्यकार प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक’, जो सुजाता दाश के बड़े भैया हैं, ने अपने कर-कमलों से यह महत्वपूर्ण कृति उन्हें उपहारस्वरूप भेंट की। इस आत्मीय उपहार ने उनके लिए इस साहित्यिक उपलब्धि को और भी अविस्मरणीय बना दिया। एक ही परिवार के दो साहित्य-साधकों के बीच स्नेह और साहित्य का यह सुंदर संबंध निश्चित रूप से प्रेरणादायी है।







