कला - साहित्य

परिवार

कविता – परिवार

(आधार छंद विधाता)

पिता परिवार के पालक, सदा सम्मान पाते हैं।

कठिन रस्ते चलें जब हम, प्रदर्शक पथ दिखाते हैं।

कहे ‘सुषमा’ सजे जीवन,

पिता के त्याग अर्पण से-

अडिग छाया बने सम्बल,

सुखों से दिन सजाते हैं।।

सजी हर मोड़ पर शुभता,

न कोई नाद करते हैं।

जिन्हें देखा नहीं रोते,वही

मन में उमड़ते हैं।

न पूछो कष्ट क्या होता,

सदा दुख को सहें छुपकर-

पिता श्री आप से जगते,

स्वयं सन्मार्ग चलते हैं।।

कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल🖋️

(रायपुर छ.ग.)

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