अपने सनातन धर्म एवं संस्कृति से जुड़ें — दिशा उमेश थवाईत

रायगढ़ – – हमारे भारत देश की संस्कृति,सनातन धर्म व संस्कार का विशिष्ट स्थान है। यही वजह है कि पूरे विश्व में हमारी गरिमामय विशिष्ट और एक अलग पहचान है। इन महत्वपूर्ण बातों का ख्याल रखते हुए हम सभी को इसे आत्मसात करना चाहिए साथ ही भावी पीढ़ी को भी अवगत कराने की नितांत आवश्यकता है। यह कहना है महिला थवाईत बरई समाज सेवा सोसायटी की अध्यक्ष श्रीमती दिशा – उमेश थवाईत का। वहीं उनका कहना है कि हमें हमेशा अपने सनातन धर्म, संस्कृति व संस्कार के साथ जुड़ कर रहना चाहिए और उनका पालन भी करना चाहिए। वहीं जो हम आज करेंगे तो भावी पीढ़ी भी हमें देखकर उसका पालन करेगी। उनका कहना है कि कोई भी सामाजिक सांस्कृतिक या सार्वजनिक या जो भी कार्यक्रम होता है तो हम सबसे पहले अपने भगवान की पूजा अर्चना व दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान का आह्वान करते हैं तो उस वक्त सभा में बैठे हुए सभी सदस्यों को खड़े होकर साथ में ईश्वर का मन ही मन आराधना करनी चाहिए। जिस तरह हम किसी मुख्य अतिथि के शुभागमन पर उनके सम्मान में खड़े हो जाते हैं। ठीक उसी तरह दीप प्रज्ज्वलित के माध्यम से हम अपने भगवान को भी उस कार्यक्रम में आमंत्रित करते हैं तो उस समय सभागार में उपस्थित सभी सदस्यों को अपने सनातन धर्म, संस्कृति व संस्कार को पहली प्राथमिकता देते हुए सम्मान के साथ खड़े होकर भगवान की वंदना करनी चाहिए साथ ही अपनी पीढ़ी को भी यह बताएं – सिखाएं ताकि हमारी संस्कृति व संस्कार के गुल की खुशबू से पूरी कायनात सुवासित हो जाए।



