रायपुर में सजी काव्य संध्या: हास्य, व्यंग्य और भक्ति की बही सरिता

रायगढ़ – – रायपुर सद्भावना साहित्य संस्थान ने विगत 29 मार्च रविवार को वृंदावन हॉल, रायपुर में एक भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हास्य, व्यंग्य और भक्ति भाव से ओतप्रोत रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार राजेन्द्र रायपुरी ने की, जबकि संचालन आरव शुक्ला ने प्रभावी ढंग से संभाला। अंचल से पधारे विभिन्न रचनाकारों ने अपने काव्य पाठ से शाम को यादगार बना दिया।
काव्य संध्या में योगेश शर्मा ‘योगी’ ने श्रीकृष्ण के मनोहारी स्वरूप का वर्णन करते हुए सुनाया—
“श्री कृष्ण का क्या खूब दर्शन है,
अधरों पर बंसी, हाथों में सुदर्शन है।”
पल्लवी झा (रूमा) ने संस्कार और मर्यादा पर आधारित अपनी रचना से श्रोताओं को प्रेरित किया, वहीं सुषमा प्रेम पटेल ने माँ कमलेश्वरी की वंदना में भावपूर्ण काव्य आरती प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
आरव शुक्ला की रचनाओं में सामाजिक यथार्थ और कटाक्ष झलकता नजर आया। उनकी पंक्तियाँ—
“उम्मीदें लादे अब कहती है दुनिया,
विद्यालय का बस्ता अच्छा लगता है…”
ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में विवेक भट्ट, पंखुरी मिश्रा, सोनिया सोनी (भिलाई), एकता शर्मा, बलजीत कौर, प्रोफेसर उरकुरा कर, राजेन्द्र ओझा, यशवंत यदु, कल्याणी तिवारी, राजेश जैन ‘राही’ और हबीब समर खान (बागबाहरा) सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी। सभी प्रस्तुतियों पर दर्शकों ने जमकर तालियाँ बजाईं, जिससे पूरा सभागार गूंज उठा।वहीं कार्यक्रम का समापन उत्साह और साहित्यिक ऊर्जा के साथ हुआ, जिसने शहर के साहित्य प्रेमियों के बीच नई प्रेरणा का संचार किया।



