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बूढ़ी माई के आँगन में.. अन्नपूर्ण बेटियों-बहुओं का प्रसाद-पर्व- प्रो. अम्बिका वर्मा

सनातनी धर्मचेतना का महापर्व है नवरात्रि! इन दिनों जैसे भक्ति, प्रेम, करुणा, शुभता और मांगलिकता जैसे जीवन-मूल्य देवी माँ के आशीर्वाद के रूप में धरती पर बिखर जाते हैं। विख्यात श्री राणी सती दादी सेवा समिति की अनपूर्णा जैसी बेटियों – बहुओं ने, नवरात्रि पर विशाल महाभंडारा का आयोजन कर, देवी माँ की चूनर को जैसे चटख लाल रंग में रंग दिया है। प्रतिदिन साथ में नगर के गणमान्य नागरिक भी शामिल होकर अपने हाथों से प्रसाद‌ वितरित कर रहे हैं। अनंत वात्सल्यमयी पूर्ण मैया मंदिर का आँगन भक्ति- समर्पण और सेवा का संगमित तीर्थ का सा बन गया है।” महाभंडारा भोजन प्रसाद में होती है आशीषों की मधुरिमा–  महाभंडारा की संयोजिका आशा-सुनील, अध्यक्ष रीना बापोड़िया , सचिव श्वेता मोदी और कोषाध्यक्ष सीमा अग्रवाल मानती हैं कि इस भोग- प्रसाद में, अनंत से उत्तरी बूढ़ी मैया और इस घरी की गोद की देवी राणी सती दादी के समवेत वात्सल्य भरे आशीर्वाद की दुर्लभ मधुरिमा है। जब हम कुछ अच्छा, पॉजिटिव करते हैं तो इस सामूहिक अरुणाई की वायब्रेशन वाली खुशबू, चारों दिशाओं में फैलने लगती है। यह खुशबू दूसरों तक पहुंचती तो वे भी स्वप्रेरित होते हैं। कुछ-कुछ दीपावली पर्व की मानिन्द ! जैसे एक जजना दिया अनेक दियों को ज्योतित कर जाता है। कुछ इसी तरह श्री राणी सती दादी सेवा समिति का चर्चित और प्रशंसित यह महाभंडारा का आयोजन है। भंडारा–प्रसाद के स्वाद और प्रभु मिठास की खासी चर्चा है।

तरल आनन्द का अनुभावन – – महाभंडारे की इन अन्नपूर्णाओं की साँझी और उजली सोच है कि जिंदगी में दो और दो हमेशा चार नहीं होते कभी – कभी ज्यादा भी हो जाते हैं। जिंदगी तो किसान की घरती की तरह होती है। पूर्व अध्यक्ष आशा अग्रवाल, अनिता गर्ग, संतोष अग्रवाल, कांता अग्रवाल, मीना बेरीवाल, किरण मित्तल, ममता अग्रवाल, ललिता अग्रवाल, दर्पणा सिंघल, श्वेता -अमित मोदी, रोमी निगानिया एवं सुभाष चिराग, संजय कालू सहित समस्त सदस्य कहते हैं किसान के हाथों एक मुट्ठी बीज, धरती पर गड़ कर हजारों- फूलों- बालियों में तब्दील हो जाता है। प्रकृति हँसने लगती है। महाभंडारा का यह आयोजन, तरल खुशियों का एक सिंदूरी संसार रचता है।

महाभंडारा बाँटने – ‘टुगिव’ का विशाल उत्सव – – आज की हमारी व्यस्त जिंदगी की आपाधापी में हम बहुत सारे जीवन-मूल्यों से लगभग दूर होते जा रहे हैं। देना – ‘टू गिव’ एक बेहद खूबसूरत फिलासफी भी है और सीधी-सरल बात भी । इस महाभंडारा मे रोज हजारों लोगों ने मातारानी का भोजन-प्रसाद पूरी तृप्ति के साथ ग्रहण किया। यह तृप्ति उनके चेहरे और बॉडी लैंग्वेज से झलकती रही है। विदे आशा-सुनील, संतोष- सुभाष अग्रवाल, सुलोचना अग्र, आशा– एयरटेल, अनिता सिंघानिया, रोमी अग्रवाल , शीतल अग्रवाल , सुलोचना डी कॉट, विनीता मित्तल, अनिता नरेडी, मंजु बोंदिया, किरण पटवारी, नीरू अग्र पुष्यर गोयल, अंजू चरक, संगीता गिरघर ज्योति अग्रवा., हेमा अग्रवाल, वंदना पोद्दार , अनुराधा अग्रवाल, स्वीटी सिंघानिया, स्वीटी मोदी बहुत विनम्रता से कहती हैं कि महाभंडारा से जुड़‌कर अपने हाथों से प्रसाद बॉटकर हम सब आत्मिक आत्मिक आनन्द मिलता है। वैसे भी हम सब निमित्त मात्र हैं। यह महाभंडारा तो राणीसती दादी जी ही सम्पन्न करा रहीं हैं। ‘किसी’ को ‘कुछ’ देने वाली’ वे’ हैं। यह तो ‘उनकी’ कृपा है कि दिलवाने के लिए ‘उन्होंने’ हमारे हाथों को चुना है! सदा सुहाग सजा रहे.. भरा रहे आँचल तुम्हारा – -अपने पारिवारिक जीवन में बेहद व्यस्त ये दादी माँ की आराधिकाएँ, महाभंडारे सहित अनेक सामाजिक-सांस्कृतिक और धार्मिक सरोकारों से जुड़ी हुई हैं। इनका समर्पण-भाव प्रणम्य है। ये बहुएँ-बेटियाँ जब बूढ़ी मैया के दर्शन-पूजा के लिए आए लोगों के हाथों में महाभंडारे का प्रसाद धरती है तब भक्तों के कंठ से, या फिर मौन स्निग्ध आशीष इन सबके आँचल में भर देते है। रायगढ़ की मिट्टी में ढेरों कहानियाँ हैं सच्ची वाली! बूढी माई के आंगन में सजा यह महाभंडारा आयोजन है। सबको सच्ची खुशियों का आस्वाद प्रदान करती है। अशेष शुभकामनाएँ है इन समस्त अपूर्णा आराधिकाओं को!

प्रो अंबिका वर्मा

सिटी कोतवाली रायगढ़

मो. 8839362121

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