संगीत बिन जीवन और जहान सूना – सूना – – अमित प्रधान

राज्य को गौरवान्वित कर रहे नामचीन संगीतकार अमित प्रधान
रायगढ़ – – हमारे हिंदू धर्मशास्त्र में यह मान्यता है कि संगीत की उत्पत्ति भगवान शिव के डमरु से हुई है और सृष्टि के कण – कण में इसकी असंख्य ध्वनियाँ समाहित हैं। जिनका प्रभाव भी हृदय से महसूस होता है। यह अतिशयोक्ति नहीं कि संगीत से हर जीव अछूता नहीं खासकर मनुष्य का जीवन भी इसके बिन अधूरा है। चाहे खुशी का पल हो या दुख का क्षण हर परिस्थिति में इसकी विशेष महत्ता है और सदैव रहेगी भी। क्योंकि यह सीधे आत्मा को सुकून तो देती है साथ ही परमात्मा से जुड़ने का भी सशक्त माध्यम भी है। इसके अतिरिक्त इसकी तुलना एक अथाह समंदर से करना भी न्योचित है क्योंकि इसकी भी गहराई में न जाने कितने खुशी के मोती छिपे हुए हैं तो अनंत भावनाओं की खूबसूरत लहरें भी समाहित हैं। वहीं हम जब भी इसमें गोता लगाएंगे तो कुछ न कुछ हासिल होता ही है। जिसे सुनकर हर मन और हृदय सुकून और आनंद से भर जाता है। यह कहना है राज्य के नामचीन संगीतकार अमित प्रधान का। जिन्होंने अपने संगीत प्रतिभा की बदौलत से छत्तीसगढ़ गीत – संगीत को नव्यता देकर राज्य और रायगढ़ शहर का मान बढ़ाने में अग्रणी भूमिका का निर्वहन विगत 27 वर्षों से कर रहे हैं। साथ ही संगीत के जहान में अपनी एक अलग विशिष्ट पहचान बनाने में भी कामयाब हैं। बेहद प्रतिभाशाली और मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी युवा संगीतकार अमित प्रधान ने अपने संगीत सफ़रनामे को अत्यंत ही विनम्रता के साथ शेयर किए।

धुनों के जादूगर अमित – – छत्तीसगढ़ के अनेक एल्बम, फिल्म, उडिया एल्बम, फिल्म व बॉलीवुड की हिंदी फिल्म चमन बहार में सहित अनेक गीतों को अपने खूबसूरत धुन से संवारने वाले युवा संगीतकार अमित प्रधान बहरहाल छालीवुड फिल्म इंडस्ट्रीज व पूरे राज्य में किसी परिचय के मोहताज नहीं उनके हिट गीतों व फिल्मों की लंबी फेहरिस्त है। संप्रति आज भी पूरे मनोयोग से हर गीत को अपने कर्णप्रिय धुनों से नवरुप देकर बेशुमार कलाप्रेमियों का दिल जीत रहे हैं साथ ही बेहद प्यार और आशीर्वाद भी पा रहे हैं तो समयानुसार अपनी प्रतिभा की बदौलत सम्मानित भी हो रहे हैं। उन्होंने अत्यंत ही विनम्रता से कहा कि बचपन से ही मुझे गीत – संगीत के प्रति बेइंतिहा लगाव है। स्कूल के दिनों से ही गीत लिखा करता था साथ ही संगीत सुनते ही मेरा मन पूरी तल्लीनता के साथ उसकी गहराई में डूब जाता था समय का भान ही नहीं होता था। मेरा यही जुनून अनवरत जारी रहा तब मैनें तय किया कि अब गीत – संगीत के पथ में ही आगे बढ़ना है और कदम फिर मेरे बढ़ते गए। वे कहते हैं कि मुझे गुरु श्री शर्मा सर, गुरु ताराकांत पंडा, राज्य के सुप्रसिद्ध भजन सम्राट दिलीप षडंगी और सुप्रसिद्ध भजन गायक मेरे आदरणीय भैया देवेश शर्मा, संजय अग्रवाल भैया का विशेष सहयोग मिला फिर पीछे मुड़कर न देखा और ना ही अंजाम की परवाह किया और सौभाग्य से आगे बढ़ने का सुअवसर मिलता गया।
बेहद करीब से जाना क्या है संघर्ष – – वे कहते हैं कि विगत 1998 – 2000 के समय में हम रिकार्डिंग करने के बाद अपने साथी के साथ कैसेट लेकर उसे बेचने के लिए मोटरसाइकिल से पूरे जिले व छत्तीसगढ़ के सभी क्षेत्रों में दौरा करते थे। कुछ लोग कैसेट को पसंद करते थे कुछ लोग नहीं। एक समय यह भी आया कि प्रचार दौरा के दौरान मेरे सभी पैसे खत्म हो गए तो एक होटल में कैसेट देकर उस पैसे से नाश्ता पानी किए, उफ़ क्या वो लम्हा था। फिर भी हृदय में असीम धैर्य को धारण कर पीछे नहीं हटा। ईश्वर की कृपा से मेरी मेहनत रंग लाई और कई मेरे गीत – संगीत सुपर हिट हुए साथ ही लोगों का भी बेइंतिहा प्यार मिलने लगा। जिससे मुझे भी अंदर से खुशी हुई और आत्मविश्वास भी बढ़ा। वक्त के साथ – साथ खुद को तराशने में कोई कमी नहीं की। जिसका प्रतिफल मुझे मिलने लगा। वहीं उन्होंने कहा कि वास्तव में धैर्य और मेहनत बिन कामयाबी नामुमकिन है। मैंने बेहद करीब से जाना कि जिंदगी का क्या संघर्ष है।
मिला बॉलीवुड कलाकारों का सानिध्य – – संगीतकार अमित प्रधान कहते हैं कि छत्तीसगढ़ी लोकगीतों में कुछ नवीनता लाने के प्रयोजन से आधुनिक संगीत के साथ उस समय हमारी टीम ने बॉलीवुड के नामचीन सिंगर सोनू निगम, नितिन मुकेश, सुरेश वाडेकर से संपर्क किया और उनकी मखमली सदाओं से एल्बम को नवरुप दिए। जिसे समय आने पर छत्तीसगढ़ के कलाप्रेमियों का भरपूर स्नेह मिला। वहीं मुंबई में रिकार्डिंग के दौरान अनेक नामचीन बॉलीवुड कलाकारों से मिलने और कुछ नया सीखने का सौभाग्य भी मिला जिससे आगे बढ़ने का भी मार्गप्रशस्त हुआ। वहीं उन्होंने कहा कि जीवन में तो संघर्ष करना ही पड़ता है। इसलिए मेरा यह मानना है कि संघर्ष भी ईमानदारी से कीजिए और उस संघर्ष से कुछ नया सीखने का प्रयास करने में ही भावी पल सुकून भरा अवश्य होता है।

अपनों का यूँ ही मिलता रहे प्यार – – उन्होंने अत्यंत ही विनम्रता से कहा कि “आमा पान के पत्री” जसगीत को वर्षों से अपना प्यार और मुझ जैसे विद्यार्थी को अपना आशीर्वाद दे रहे हैं, इसके लिए मैं छत्तीसगढ़ की जनता का बहुत- बहुत आभार और धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ ।वहीं इस ब्रम्हांड के महादेव से प्रार्थना करता हूँ कि भविष्य में भी इसी तरह से संगीत की सेवा कर सकूँ। ईश्वर की कृपा, माता- पिता और गुरुजनों, छत्तीसगढ़ महतारी, मेरे रायगढ़ की माटी, छालीवुड के निर्माता निर्देशक, बुद्धिजीवी हमारे म्यूजिशियन, गुरुजन जैसे गीतकार और सुस्वर गायक कलाकारों के सहयोग ओर आशीर्वाद से इंडस्ट्री में 27 वर्ष पूरे कर पाने में सक्षम रहा हूँ । इसी तरह सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़ की जनता का निस्वार्थ प्यार और आशीर्वाद से मैं यहाँ तक पहुँच पाया हूँ। वहीं मुझे सदैव समाज के सभी जन से यूँ ही आशीर्वाद और स्नेह मिलता रहे। यही मेरी पूँजी है यही मेरे जीवन की खुशी है। स्मार्ट सिनेमा के 25 वीं वर्षगाँठ पर ढेरों बधाई और आगे छालीवुड इंडस्ट्री के सुनहरे पलों को मैगज़ीन के माध्यम से सहेजकर रखने हेतु सादर शुभकामनाएँ भी देता हूँ। सभी सहयोगियों के प्रति हृदय से आभारी हूँ ।
अनवरत जारी रहेगा संगीत का सफ़र – – उन्होंने अत्यंत ही विनम्रता से कहा कि गीत – संगीत मेरे रगों में शुमार है। हर पल, हर कहीं से कुछ न कुछ नया सीखने के लिए मन विकल रहता है क्योंकि संगीत अनंत है इसलिए साधना भी निहायत जरुरी है। यही वजह है कि दिल से मेहनत करते हैं ताकि कला प्रेमियों को हृदय से आनंद मिले उनकी खुशी ही मेरे जीवन की खुशी है। वहीं उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ में अच्छे कलाकारों की कमी नहीं है एक से बढ़कर एक कलाकार कला जगत में हैं और बेहद उम्दा प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं पहले की अपेक्षा आज आधुनिक तकनीक सुविधाएँ भी अच्छी हो गई हैं। जिसका लाभ कला जगत के कलाकारों को मिल रहा है और भविष्य में मिलेगा भी। साँसों के अंतिम कतरे तक मेरा संगीत का सफ़र अनवरत जारी रहेगा। संप्रति अपने एपी म्यूजि़क स्टुडियो रायपुर के जरिए अनेक एल्बम, फिल्म व कई म्यूजि़क कंपनी के लिए मेरी संगीत साधना जारी है। छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा करते हुए हमारे कर्णप्रिय लोक गीत – संगीत को विश्व स्तर में एक नयी पहचान देने की दिली ख्वाहिश है।



