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कला धानी रायगढ़ में वेद कला संगीत महोत्सव का हुआ भव्य व यादगार आयोजन

रायगढ़ कला साहित्य का तीर्थ स्थल – डॉ. विनय पाठक

रायगढ़ – –  कला गुरु स्व.वेदमणि सिंह ठाकुर की जयंती के पावन अवसर पर लक्ष्मण कला-संगीत महाविद्यालय, रायगढ़ द्वारा वेद कला संगीत महोत्सव के भव्य एवं गरिमामय आयोजन का  द्वितीय साहित्यिक सत्र दिनांक विगत 13 मार्च को बिलासपुर से पधारे डॉ. विनय कुमार पाठक- कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार  तथा पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के मुख्य आतिथ्य और डॉ. मीनकेतन प्रधान पूर्व प्राध्यापक किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय रायगढ़,संस्थापक विश्व हिन्दी अधिष्ठान की अध्यक्षता में  सेठ किरोड़ीमल शासकीय पोलीटेक्निक संस्थान के सभागार में  सम्पन्न हुआ। यह आयोजन रायगढ़ के कला साहित्यिक इतिहास के अभिनव कलेवर के रूप में स्थापित हुआ है ।जिसकी अनुगूँज दूर तक जायेगी।

पद्मश्री के थिरकन से आगाज़ – – प्रथम सत्र का उद्घाटन कत्थक घराना रायगढ़ के कीर्तिमान नृत्याचार्य पद्मश्री रामलाल बरेठ के गुरुत्व आभा मण्डल में शास्त्रीय संगीत की थिरकन के साथ हुआ ।जिसने दर्शक दीर्घा को आनन्द विभोर कर दिया । इसी कड़ी में दूसरे सत्र के मुख्य अतिथि डॉ .विनय पाठक ने अपने उद्बोधन में रायगढ़ की ऐतिहासिक कला -साहित्य परंपरा के राष्ट्रीय योगदान का रेखांकन करते हुए वेदमणि सिंह ठाकुर के बहुमुखी व्यक्तित्व को अहम बताया।

कला गुरु ने समाज को रचनात्मकता की नयी दिशा दी–कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ. मीनकेतन प्रधान ने संगीत – साहित्य के शीर्ष साधक  स्व .वेदमणि सिंह ठाकुर को  राजा चक्रधर सिंह की संगीत कला परंपरा और रायगढ़ की गौरवशाली साहित्यिक विरासत का उन्नायक बताते हुए अपने उद्बोधन में नयी पीढ़ी को समर्पित भाव से रचनात्मकता और समाजोन्मुखी दिशाओं की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी । उन्होंने हिन्दी छत्तीसगढ़ी और ओड़िया साहित्य की संगम स्थली रायगढ़ को राष्ट्रीय पटल पर ऐतिहासिक दृष्टि से श्रीसम्पन्न निरूपित किया तथा  वर्तमान दौर में रायगढ़ सहित छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर नयी पहचान  दिलाने की दिशा में इस आयोजन की महती भूमिका को सराहनीय बताया। इस अवसर पर बिलासपुर के प्रतिष्ठित साहित्यकार डॉ. रमेशचन्द्र श्रीवास्तव ने वेद कला महोत्सव के प्रथम आयोजन को वेदमणि सिंह ठाकुर के संगीत और साहित्यिक व्यक्तित्व का सफल निरूपित किया। वहीं बिलासपुर से आये साहित्यकार अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर और डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने कलागुरू को काव्यात्मक भावांजलि अर्पित करते  हुए एक प्रेरक व्यक्तित्व साबित किया।

विशिष्टगणों ने किया शिरकत – – मंच पर प्रतिष्ठित पत्रकार और वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष त्रिपाठी  तथा मीना ठाकुर की गरिमामयी उपस्थिति रही । इस अवसर पर आनंद सिंघनपुरी द्वारा लिखित वेदमणि सिंह ठाकुर के व्यक्तित्व कृतित्व पर केन्द्रित पुस्तक ‘ एक संगीतज्ञ की देहरी से ‘ का लोकार्पण किया गया । साथ ही वेदमणि सिंह ठाकुर के जीवन काल में प्रकाशित उनकी दूसरी काव्य कृति संगीतिका का लोकार्पण भी हुआ जिसमें उनकी सुपुत्री द्वय गीता ठाकुर और मीना ठाकुर की विशेष भूमिका रही । इस सत्र के महनीय उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए युवराज सिंह आजाद ने इसकी परंपरा को आगामी समय में अधिक समृद्ध करने का आह्वान किया । गीता ठाकुर , मीना ठाकुर , मनोज श्रीवास्तव, डॉ. आशा मेहर , सुधा  देवांगन तथा अन्य साहित्यकारों ने आयोजन व्यवस्था में उत्कृष्ट दायित्व निर्वहन किया ।अभिभाषण खंड का आकर्षक मंच संचालन रवींद्र चौबे और काव्य पाठ खंड का मंच संचालन आनंद सिंघनपुरी ने किया।

काव्य पाठ से गुँजित हुआ सदन – – उक्त गरिमामय आयोजन में सुश्री गीता उपाध्याय,श्रीमती साधना मिश्रा,डॉ आशा मेहर किरण’,डॉ विद्या प्रधान,डॉ सुधा देवांगन “सुचि” श्रीमती लिशा पटेल,धनेश्वरी देवांगन,दिव्या पाण्डेय,सोनल श्रीवास,सरोज साव कमल,सुश्री सुशीला साहू,नेतराम साहू,डॉ . गुलशन खम्हारी प्रदुम्न’, प्रदीप उपाध्याय,कन्हैया लाल गुप्ता,अंजनी कुमार तिवारी,युवराज सिंह,रश्मि वर्मा,पूर्णिमा चौधरी,सूरज पासवान,देवेंद्र गुप्ता,मनहरण सिंह ठाकुर,रामगोपाल शुक्ल ,चैतन्य गोपाल,श्रीकांत चैती स्वाति पड्या,प्रो के के  तिवारी आदि कवि -कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।वहीं अंत में मनोज श्रीवास्तव ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में कलागुरु महोत्सव के सभी सदस्यों का सराहनीय योगदान रहा।

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